जिस स्मार्ट सिटी को पाने के लिए अपना मेरठ केंद्र और प्रदेश सरकार से दमदारी से लड़ रहा है। उसके लिए नगर निगम के पार्षद ही न तो जागरूक दिख रहे हैं और न ही गंभीर। इसकी बानगी बृहस्पतिवार को स्मार्ट सिटी के प्रारूप के संबंध में टाउन हॉल में महापौर द्वारा बुलाई गई बैठक में देखने को मिली।
जिसमें 89 में से 47 पार्षद नदारद रहे। बैठक में शिरकत करने पहुंचे अधिकांश पार्षदों ने भी स्मार्ट सिटी के बजाय गंदगी और इधर-उधर की बातों पर रोना शुरू कर दिया। कुछ पार्षद ऐसे रहे जिनमें स्मार्ट सिटी पाने का जज्बा बखूबी दिखा।
स्मार्ट सिटी की तैयारियों में सबसे अहम रोल नगर निगम का ही है। लेकिन जनता से विकास के बड़े-बड़े वादे कर निगम में पहुंचने वाले अधिकांश पार्षदों ने ऐसी अहम घड़ी में नजरें फेरनी शुरू कर दी हैं। नगर निगम में 80 निर्वाचित पार्षद हैं। इनमें से तीन महीने पहले एक पार्षद की मृत्यु हो चुकी है। यानी अब 79 पार्षद निर्वाचित हैं।
10 पार्षद सरकार द्वारा मनोनीत किए गए हैं। इनकी जिम्मेदारी है कि वह शहर के विकास और जनता को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सदन में प्रस्ताव पास करें। जनहित में कानून बनाएं। इनमें से अधिकतर पार्षद अपने अधिकार भूल गए हैं। यही कारण है कि वह स्मार्ट सिटी के प्रारूप पर चर्चा करने टाउन हॉल तक नहीं पहुंचे।
गायब पार्षदों से जनता मांगेगी जवाब
स्मार्ट सिटी की बैठक से अनुपस्थित रहने वाले सभी पार्षदों से जनता जवाब मांगेगी। क्योंकि जब ऐसे महत्वपूर्ण बिंदु पर भी पार्षद गंभीर नहीं हैं तो फिर ऐसे पार्षदों का क्या फायदा।
‘सभी को होना चाहिए स्मार्ट सिटी के लिए गंभीर’
मेरठ। महापौर हरिकांत अहलुवालिया ने कहा कि स्मार्ट सिटी के प्रति गंभीर होने की पहली जिम्मेदारी हमारी यानी जन प्रतिनिधियों की बनती है। सभी पार्षदों को स्मार्ट सिटी पर गंभीर होना चाहिए। जो पार्षद बैठक में नहीं पहुंचे हैं उनसे भी आह्वान है कि वह अपने वार्ड की जनता को जागरूक करें। स्मार्ट सिटी के बिंदुओं पर अधिक से अधिक वोटिंग कराएं। ताकि डीपीआर बननी शुरू हो जाए। कंसलटेंट भारत सरकार की वेबसाइट का लिंक शुरू करने वाले हैं। महापौर ने स्मार्ट सिटी कंसलटेंट टीम से कहा कि स्मार्ट सिटी के लिए वह हर सहयोग के लिए तैयार हैं।
सूरत की भी बदली थी ‘सूरत’
मेरठ। स्मार्ट सिटी में शहर की बदलने वाली सूरत की जानकारी देने और जनता को जागरूक करने के लिए बुलाई गई बैठक में जैसे ही कुछ पार्षदों ने शहर में फैली गंदगी पर सवाल दागने शुरू किए तो गुजरात से आए कंसल्टेंट टीम के लीडर बीके पटेल ने भी मौका नहीं छोड़ा। उन्होंने कहा कि 1993 में प्लेग की बीमारी आयी थी। उस समय गुजरात के सूरत शहर में पसरी गंदगी की स्थिति ऐसी थी, जैसी आज मेरठ की है। पटेल ने जहां निगम प्रशासन को नसीहत दी, वहीं पार्षदों को भी जागरूकता का संदेश दिया।
प्रोजेक्टर पर बताया, ऐसा होगा स्मार्ट सिटी
मेरठ। टीम लीडर बीके पटेल ने प्रोजेक्टर पर पार्षदों को स्मार्ट सिटी की तस्वीर दिखाई। कहा कि स्मार्ट सिटी का मतलब जनता को बेसिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है, वह भी नए तरीके के साथ। जनता को ऑक्सीजन के लिए पेड़-पौधे चाहिए। रोजगार के साधन चाहिए। पीने का साफ पानी चाहिए। सुंदर और अतिक्रमण मुक्त सड़कें चाहिए। गंदगी और सीवर से निजात चाहिए। ट्रैफिक व्यवस्था, सुरक्षा, बिजली, यातायात के साधन अच्छे हों, चिकित्सा और शिक्षा का स्तर बढ़े। स्मार्ट सिटी में ये सभी मूलभूत सुविधा बड़े स्तर पर दिलायी जाएंगी।
‘महिला पार्षद ने बोलती कर दी बंद’
पार्षद प्रियंका गुर्जर ने कहा कि हम ओलंपिक की मशाल की तरह स्मार्ट सिटी की मशाल भी थामेंगे। मेरठ को स्मार्ट बनाने के लिए हमें राजनैतिक दलों में नहीं बंटना है। बल्कि एकजुट होकर स्मार्ट सिटी की मशाल को जलाना है। हम जनता को भी जागरूक करेंगे। ताकि शहर की अधिक से अधिक जनता स्मार्ट सिटी के बिंदुओं पर वोट कर सके और अपनी राय दे सके। महिला पार्षद के इस वक्तव्य पर बैठक में उपस्थित उन सभी पार्षदों की बोलती बंद हो गई, जो स्मार्ट सिटी पर कम और इधर-उधर की बातों पर अधिक बोल रहे थे।