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एक सेंटीमीटर से छोटे ट्यूमर भी अब पकड़ में

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एक सेंटीमीटर से छोटे ट्यूमर भी अब पकड़ में
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मेरठ। लोकप्रिय अस्पताल में रविवार को एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड पर कार्यशाला का आयोजन हुआ। इसमें एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड (ईयूएस) से होने वाले फायदों, नई तकनीक के जरिए पेन्क्रियाज और जिगर की जटिल समस्याओं के निवारण पर चर्चा की गई। इस दौरान 50 गंभीर मरीजों का निशुल्क उपचार किया गया। कार्यशाला में देशभर से आए 30 से ज्यादा पेट और जिगर रोग विशेषज्ञ शामिल हुए।
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पेट एवं जिगर रोग विशेषज्ञ डॉ. सत्यार्थ चौधरी ने बताया कि कार्यशाला के दौरान उन्होंने मुंह के रास्ते खून के रिसाव वाले एक मरीज के पेट में रक्त प्रवाह को रोककर जान बचाई। उन्होंने बताया कि एंडोस्कोपिक अल्ट्रसाउंड के माध्यम से एक सेंटीमीटर से भी छोटे पेन्क्रियाज के ट्यूमर को पकड़ा जा सकता है, जो कि सीटी स्कैन से भी चूक सकते हैं। मैसूर से आए उदर रोग विशेषज्ञ डॉ. आरके वाधवा ने बताया कि पिछले 30 सालों से एंडोस्कोपी के क्षेत्र में अद्भुत और सफल प्रयोग हुए हैं। यह तकनीक बहुत बेहतर हो गई है। अब पहले से पतले स्कोप हैं, जिनका प्रयोग कर हम सटीक जांच और इलाज में कर सकते हैं। गाजियाबाद से आए डॉ. संजय कुमार गर्ग ने कहा कि अब समस्या भोजन से कहीं अधिक लाइफ स्टाइल से संबंधित है, जिसे सुधारना जरूरी है। सामान्य और पौष्टिक खाना, नियमित एक्सरसाइज और मेडिटेशन जैसी चीजें अपनाई जानी चाहिए। कार्यशाला में लुधियाना, गोरखपुर, भटिंडा, श्रीगंगानगर, चेन्नई, दिल्ली, मैसूर, गाजियाबाद और मुंबई से चिकित्सक पहुंचे। निर्मला देवी, सुरजीत सिरोही, रिंकू, मीनाक्षी, अभिनव, देवी सिंह, रजनीश, फरमीना, ऋषिपाल और सविता देवी आदि का निशुल्क उपचार किया गया।
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