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मेरठ में बूचड़खाने का फर्जीवाड़ा, कागज में काम मुर्गीदाने का, चल रहा था पशुओं का कटान

Mon, 27 Mar 2017 02:51 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
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अलीपुर में बेस्ट एग्रो फैक्ट्री में कार्रवाई करती टीम
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नाम मुर्गीदाना बनाने का, लेकिन काम सारा अवैध। मीट का पूरा कारोबार इसी नाम पर फल-फूल रहा है। बुधवार को टीम ने छापा मारा तो यह तथ्य सामने आए। ऐसे में मौके पर मिले मीट के नमूने भरे गए और जब्त भी किया गया। बुधवार को टीमें निकलीं तो अवैध धंधे की परतें खुलती चली गईं। सूबे का निजाम बदलने पर यह सब हुआ, क्योंकि विभाग भी वही थे और अधिकारी भी। मुर्गीदाने का धंधा भी अवैध ही था। यहां मिले बोरों पर कुछ नहीं लिखा था। कुछ फैक्ट्रियों का लाइसेंस 31 दिसंबर 2016 को खत्म होने की बात कही गई पर यहां काम चलता मिला।
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अधिकारियों की मनमानी

मीट प्लांट पर लगाई सील
विद्युत कनेक्शनों को लेकर भी गड़बड़ी थी। कई फैक्ट्रियों की बिजली काटी गई। कहीं पशुपालन विभाग की एनओसी नहीं थी। शायद ही कोई विभाग हो, जिसके पूरे दस्तावेज मौजूद हों। छापे पड़े तो मीट फैक्ट्री संचालक आरोप-प्रत्यारोप पर उतर आए। यूनिवर्सल में भी फैक्ट्री संचालक वेटनरी ऑफिसर पर दो लाख रुपये की वसूली का आरोप लगाने लगा। हैरत की बात यह है कि इस फैक्ट्री संचालक ने स्लॉटर हाउस के लिए लाइसेंस अप्लाई किया था तो इसी वेटनरी ऑफिसर ने एनओेसी नहीं दी थी। अधिकारियों ने कहा कि यह आरोप भी अब इसलिए ही लग रहा है।

आरोप-प्रत्यारोप पर उतरे

पशुओं से भरी गाड़ियां पकड़ी
छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने मीट प्लांटों को तो सील कर दिया, लेकिन ब्लास्ट को चलाने के लिए छोटा गेट खोल दिया। यही नहीं, ब्लास्टों में रखे मीट को भी प्लांट मालिकों की सुपुर्दगी में दे दिया गया। कार्रवाई के दौरान सामने आया कि चार रैंडरिंग प्लांट अलग-अलग फैक्ट्रियों से आए पशुओं के अवशेषों से मुर्गी का दाना तैयार करने का दावा कर रहे हैं। जिसमें फ्रीजर की कोई जरूरत नहीं है। इसके बाद टीम ने अवशेषों के नमूने लिए और कई टन मीट मौके पर ही छोड़कर सील लगा दी। टीम ने लिखित रूप से कच्चे माल को फैक्ट्री संचालकों की सुपुर्दगी में भी दे दिया। हालांकि, बाद में सारा पशु अवशेष बाहर निकालने की अनुमति दे दी गई।

...फिर निकाल दिया मीट

हापुड़ रोड स्थित फैक्ट्री में कार्रवाई करती टीम
अल कैफ में उस समय अधिकारी भड़क गए, जब यहां लगे सीसीटीवी कैमरे गायब हो गए। डीवीआर मांगी तो नहीं मिली। ऐसे में पुलिस अधिकारी भड़क गए। कहा कि कुछ देर पहले कैमरे यहीं लगे थे पर अचानक कहां गए। कहा कि मुकदमा दर्ज होगा। इस पर शाहिद अखलाक ने बात की। कहा कि किसी ने गलतफहमी में कैमरे उतारे होंगे। कैमरे जहां लगे हैं, वहां तो वैसे भी ऑफिस है। ऐेसे में उन्हें उतारने का कोई औचित्य नहीं था। तब जाकर अधिकारी माने।

सीसीटीवी हटाने पर भड़की पुलिस

हापुड़ रोड स्थित अल अक्सा में पहुंचे एसपी सिटी
जब छह मीट फैक्ट्रियों में कार्रवाई चल रही थी, उसी दौरान अल-फहीम के अंदर से पशुओं से भरी गाड़ियां निकल रही थीं। लगातार आठ से दस गाड़ियां फैक्ट्री से निकाली गईं। बताया गया कि शहर के मीट व्यापारी अपने पशुओं को कटाने के लिए अल फहीम लेकर पहुंचे थे। कंपनी के अधिकारियों ने पशु कटान से इनकार कर दिया। वह सभी अपने अपने पशुओं को गाड़ी में लादकर शहर की तरफ जाते नजर आए।
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जांच टीम को देखते ही पशुओं को ले भागे व्यापारी

मौके पर पुलिसफोर्स तैनात
पूर्व सांसद हाजी शाहिद अखलाक ने कहा कि प्रदेश सरकार कह रही है कि मुस्लिमों को डरने की जरूरत नहीं है। सरकार ने यह नहीं कहा कि वैध कारोबार पर कार्रवाई करें या बिना नोटिस सील लगा दी जाए। जो फैक्ट्रियां लाइसेंसी हैं, उन्हें तो सरकार संरक्षण देती है। यह अधिकारियों की मनमानी है। सीएम से मिलकर बात करेंगे। जिन फैक्ट्रियों को सील किया है, वे पुरानी हैं तो मानचित्र कहां से आएंगे। नियम था तो पहले क्यों नहीं मांगे गए। कंपनी संचालक तो कंपाउंड कराने को भी तैयार हैं।
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