नई हवाओं को शोहरत बिगाड़ देती है, कबूतरों को खुली छत बिगाड़ देती है... मिलाना चाहा है इंसा को जब भी इंसा से, सारे काम सियासत बिगाड़ देती है। मशहूर शायर राहत इंदौरी की ये पंक्तियां पढ़िये और कैराना, कांधला के लोगों की मनोदशा पर गौर करिये। वहां के वर्तमान हालात से ये पंक्तियां काफी हद तक इत्तफाक रखती हैं।
पहले कैराना, फिर कांधला। संभव है कि आने वाले दिनों में कुछ और जगहों के नाम सुर्खियों में हों। भाजपा सांसद द्वारा जारी सूची में शामिल नामों पर भी सवाल उठ रहे हैं। सच तो यह है कि यह है कि अंदरखाने सियासत और अपराधियों की जुगलबंदी के आरोपों ने व्यापारियों में दहशत की बुनियाद मजबूत की। अब इसी सियासत के कारण लोगों को माहौल बिगड़ने का डर सता रहा है। वर्ष-2014 में जब कैराना में तीन व्यापारियों की हत्या हुई तो वहां व्यापार करने वालों में भय के साथ नाराजगी भी थी।
हालांकि, सपा और भाजपा समेत दूसरे दलों के नेताओं ने भी व्यापारियों को सांत्वना दी थी। सपा नेताओं ने सरकार से सुरक्षा और मदद दिलाने का वादा किया था। व्यापारियों ने भाजपा सांसद हुकुम सिंह को अपने प्रतिष्ठानों की चाबी तक सौंप दी थी। इसके बाद वक्त के साथ व्यापारियों की पीड़ा सियासी बयानों में दबती गई। नितिन मित्तल जैसे युवा व्यापारी शहर छोड़ गए थे। वह स्पष्ट कहते हैं कि उन्हें किसी सियासत से कोई लेना-देना नहीं है। उन्हें कैराना में सुरक्षित माहौल नहीं मिला और अब दो साल बाद फिर से इस मामले को मुद्दा बनाया जा रहा है।
सियासी रसूख है नहीं, सिस्टम भी नहीं सुनता
कांधला के व्यापारी विक्की जैन के पिता से रंगदारी मांगी गई थी। उनका कहना है कि उन्होंने लाइसेंस के लिये हर संभव प्रयास किया। निराशा तब ज्यादा हुई, जब पता चला कि सियासी रसूख वाले कुछ लोगों को लाइसेंस मिल गए, लेकिन उनकी किसी ने नहीं सुनी।
कांधला के ही राकेश जैन बताते हैं कि पुलिस-प्रशासन उनकी नहीं सुनता। ऐसे में वह किससे मदद की उम्मीद करें। दोनाें ही कस्बोें में तमाम लोग ऐसे हैं, जिनका खुला आरोप है कि अपराधियों को सियासी संरक्षण प्राप्त है। उनसे नाम पूछा जाए तो अपना बताने से भी इनकार कर देते हैं और नेताओं के नाम पर कहते हैं कि सबका अपना-अपना हिसाब है।
अब डर है, मुहब्बत को नजर न लगे
अब जब इस मामले पर पूरी बहस चली है तो अपराधियों के डर से जी रहे लोगों को माहौल बिगड़ने का भी डर है। कैराना के जूता विक्रेता मोहम्मद शाहिद का कहना है कि इस सारे हल्ले के कारण अलग मुसीबत खड़ी होती नजर आ रही है।
उन्हें डर है कि कहीं इस सारे मामले के कारण लोगों के दिलों में दूरी न बढ़ जाए। व्यापारी राधेश्याम अग्रवाल का कहना है कि कैराना में दोनों समुदायों के लोग आपस में मुहब्बत से रहे हैं। पुराने लोगों का तो यहां तक कहना है कि नई पीढ़ी को आपसी मुहब्बत के किस्से कुछ कम याद हैं। इस कारण भी थोड़ी दूरियां बढ़ी हैं। दोनाें ही कस्बों के लोगों से बात करने पर एक बात तो साफ होती है कि अपराध से वे परेशान हैं, लेकिन दोनों ही वर्ग आपसी वैमनस्य नहीं चाहते।