लापरवाही - 1
सिस्टर इंचार्ज रंजना बंसवाल की ड्यूटी सुबह 9:00 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक थी लेकिन वह 2:00 बजे ही वहां से चली गईं। मरीजों की मृत्यु उन्हीं की ड्यूटी के दौरान हुई थी। उन्हें उसका निस्तारण कराने के बाद चाहिए था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।
लापरवाही - 2
शव मृत्यु के 30 से 45 मिनट के भीतर मोर्चरी पहुंच जाना चाहिए था लेकिन गुरुवचन और यशपाल के शव दो घंटे तक मोर्चरी पहुंचाए गए। दूसरी पाली के लोगों ने शवों को पैक किया। इस दौरान एक-दूसरे के शव पर वार्ड ब्वाय ने गलत चिट लगा दी।
लापरवाही - 3
शवों की पैकिंग के दौरान टीम लीडर डॉक्टर आईसीयू में मरीज देखने में व्यस्त थे। उन्होंने भी इस तरफ ध्यान नहीं दिया, जबकि वार्ड ब्वाय के चिट लगाने के दौरान सिस्टर इंचार्ज, स्टाफ नर्स या फिर ड्यूटी इंचार्ज चिकित्सक को वहां मौजूद होना चाहिए था।
लापरवाही - 4
यशपाल की परिजनों को उनकी मौत का पता चला तो उन्होंने कहा कि वह शव को अभी लेने आ रहे हैं। शव को मोर्चरी मत भेजिए। लेकिन वह दो घंटे के बाद आए। इस दौरान शव को मोर्चरी में रखने के बजाय होल्डिंग एरिया में ही रखा गया।
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