विक्टोरिया पार्क (भामाशाह पार्क) को लेकर एक बार स्वामित्व की जंग शुरू हो गई है। नजूल की इस जमीन को जिला प्रशासन ने मेरठ कॉलेज प्रबंधन को 99 साल की लीज पर दिया था, लेकिन बाद में नजूल नीति बदली तो प्रशासन ने जमीन वापस लेने या फ्री होल्ड की बात कही। जिस पर कालेज प्रबंधन कोर्ट चला गया। छह साल पहले कॉलेज प्रबंधन की याचिका कोर्ट से खारिज हो गई। बावजूद इसके जिला प्रशासन चुप्पी साधे बैठा रहा। अब योगी सरकार ने जब एंटी भूमाफिया टास्क फोर्स गठित किया तो इस फाइल से धूल हटी। जिला प्रशासन ने जमीन पर कब्जा लेने की तैयारी शुरू कर दी है।
ये है पूरा मामला
विक्टोरिया पार्क का कुल रकबा 15 हेक्टेयर है, जो कि करीब डेढ़ लाख वर्ग मीटर बनता है। नजूल की इस जमीन को जिला प्रशासन ने मेरठ कॉलेज प्रबंधन को 1901 में 99 साल की लीज पर दिया था। जिसमें शर्त थी कि हर 30 साल बाद इस लीज का नवीनीकरण कराना होगा। लेकिन 1997 में नई नजूल नीति आ गई। जिसमें नजूल की जमीन को लीज पर देना प्रतिबंधित कर दिया गया। ऐसी जमीन या तो सरकार के स्वामित्व में रहेगी या कब्जेदार उसे फ्री होल्ड कराएगा।
मेरठ कालेज प्रबंधन ने 2001 में लीज नवीनीकरण के लिए आवेदन किया, लेकिन तत्कालीन डीएम ने लीज नवीनीकरण न करते हुए कालेज प्रबंधन को नोटिस जारी कर दिया। जिसमें कहा गया कि या तो वह फ्री होल्ड कराते हुए जमीन का रुपया जमा करें, या उसे कब्जा मुक्त करें। इस नोटिस पर कॉलेज प्रबंधन कोर्ट चला गया और उसे स्टे मिल गया। 2007 में तत्कालीन डीएम मुकेश मेश्राम ने विक्टोरिया पार्क की फाइल को उठाया और मेरठ कॉलेज प्रबंधन को जमीन खाली करने का नोटिस जारी कर दिया। कॉलेज प्रबंधन ने अवमानना का नोटिस दिया तो डीएम ने अपना आदेश वापस ले लिया। 2011 में अदम पैरवी में हाईकोर्ट ने कालेज प्रबंधन की रिट खारिज कर दी।
छह साल से प्रशासन ने नहीं ली सुध
2011 में रिट खारिज होने के बाद जिला प्रशासन को जमीन पर कब्जा ले लेना चाहिए था। लेकिन सेटिंग के खेल में तमाम अधिकारी आए और चले गये, लेकिन किसी ने इस जमीन पर ध्यान नहीं दिया। छह साल से मेरठ कालेज प्रबंधन विक्टोरिया पार्क पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित कर रहा है। क्रिकेट एकेडमी और स्वीमिंग पूल शामिल हैं। अब योगी सरकार में सरकारी जमीनों का रिकार्ड खंगाला गया तो विक्टोरिया पार्क की जमीन का मामला भी सामने आया। अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व गौरव वर्मा ने फाइल देखने के बाद पूरे मामले को समझा और जिलाधिकारी कार्यालय भेज दिया है, जहां से इस पर निर्णय होना है।
सरकारी कोष में जाना चाहिए था पैसा
नजूल की भूमि पर स्टेडियम, बैडमिंटन एकेडमी, क्रिकेट एकेडमी और स्वीमिंग पूल आदि के साथ ही अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित कर मेरठ कॉलेज लगातार इस मैदान से कमाई कर रहा है। इस बारे में प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि नियमानुसार मैदान पर होने वाले खर्च से अलग जो आय प्राप्त होती है, उसे राजकीय कोष में जमा करना चाहिए था। लेकिन कॉलेज सारी आय अपने पास रखता रहा।
फंसे हैं कई तकनीकी पेच
विक्टोरिया पार्क पर कब्जा लेने में कई तकनीकी पेच हैं। मैदान के परिसर में ही जेल चुंगी रोड की तरफ हास्टल और प्रोफेसर क्वार्टर बने हैं। जिन्हें खाली कराना आसान नहीं है। इसके साथ ही नजूल नियमावली में लीज पर न देने का तो स्पष्ट आदेश है, लेकिन इस तरह की जमीन का बाद में किस तरह उपयोग होगा इसे लेकर कोई स्पष्ट आदेश नहीं है। ऐसे में कब्जे के बाद की स्थिति पर मंथन हो रहा है।
डीएम, मंडलायुक्त करेंगे तय
फाइल देखी है, लेकिन कुछ तकनीकी पेच हैं। मामला बड़ा है। इसलिए फाइल जिलाधिकारी को सौंप दी गई है। इस मामले पर डीएम और मंडलायुक्त के बीच वार्ता हो रही है। जो भी निर्णय होगा, उस पर कार्रवाई तय की जाएगी। - गौरव वर्मा, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व
मेरठ कॉलेज का है मैदान
मेरठ डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन (एमडीसीए) भामाशाह पार्क पर क्रिकेट गतिविधियां कराती है। एसोसिएशन मैदान के रखरखाव का खर्च उठाती है। यह पार्क एमडीसीए का नहीं, बल्कि मेरठ कॉलेज का है। - राकेश गोयल, कोषाध्यक्ष एमडीसीए
यथावत स्थिति पर रहेगा जोर
भामाशाह पार्क की लीज खत्म होने के बाद हाल में मेरठ कॉलेज की ओर से प्रतिनिधिमंडल डीएम से मिला था। पार्क पर स्पोर्ट्स एक्टिविटी होती हैं। एक सोसायटी बनाकर यथावत स्थिति रहने के लिए विचार किया जा रहा है। डीएम और कमिश्नर की माध्यम से यह काम होगा। प्रशासन भी नहीं चाहेगा कि पार्क और जमीन असामाजिक तत्वों का ठिकाना बने। - डॉ. राम कुमार गुप्ता, सचिव, मेरठ कॉलेज मैनेजमेंट कमेटी