यह मुकदमा 13 साल से न्यायालय में विचाराधीन था जिसके वादी मौ. अब्बास तथा महमूद इकबाल को पेश किया गया। वादी मुकदमा ने अदालत में पूर्व के बयान से मुकरते हुए कहा कि 30-40 लोगों की भीड़ में से नारेबाजी की गई थी।
मौके पर किसी के द्वारा भीड़ में डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी, संदीप पहल, परमात्मा शरण कंसल, संदीप महाजन, सतीश गर्ग, सुनील शर्मा के नाम बताए गए थे। लेकिन मैंने उपरोक्त लोगों को स्वयं नहीं देखा। उनके नाम लोगों द्वारा बताए गए नामों के आधार पर लिखा दिए थे।
इन लोगों ने न तो पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ कोई नारेबाजी की थी और न गालीगलौज या जान से मारने की धमकी दी थी। जिस पर गवाहों को पक्षद्रोही करार दिया गया। इस आधार पर एसीजेएम-4 अपूर्व सिंह ने सभी आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया।
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