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सिवाल तक सिमटी रालोद नहीं जीत पाई सीट

Sun, 12 Mar 2017 02:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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 रालोद को सिवालखास तक समेट चुके पूर्व जिलाध्यक्ष एवं प्रत्याशी यशवीर सिंह दूसरी बार भी यह सीट नहीं जीत सके। यही नहीं, पहले से कम वोट मिलने के बाद दूसरे से तीसरे स्थान पर खिसक गए।
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जाटों की संख्या के हिसाब से सिवालखास रालोद की सबसे ज्यादा हॉट सीट मानी जाती है। इस सीट से चुनाव लड़ने के लिए एक दर्जन से ज्यादा नेता भी जिले की राजनीति के बजाय यहीं की राजनीति और मुद्दों को तरजीह देते रहे हैं। यहां तक कि पार्टी में दस साल तक जिलाध्यक्ष और लगातार दो बार प्रत्याशी रहे यशवीर सिंह का भी पूरा फोकस इस सीट पर ही रहा। इसका हश्र यह हुआ कि पार्टी बाकी छह सीटों से कट गई और सियासी वजूद सिमटता चला गया।
नेताओं और कार्यकर्ताओं की शिकायत के बाद भी हाईकमान ने जिलाध्यक्ष को नहीं बदला। दोनों विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी बनाने को लेकर भी विरोध हुआ और लोगों ने जिताऊं उम्मीदवार को टिकट देने की मांग की। लेकिन पार्टी नेतृत्व ने सभी की आवाज को दरकिनार कर दोनों बार यशवीर सिंह को टिकट दिया। टिकट न मिलने से नेताओं की नाराजगी का खामियाजा पार्टी को हार के रूप में भुगतना पड़ा। पार्टी सूत्रों के मुताबिक इस सीट पर करीब 70 हजार जाट वोट होने के बाद भी यशवीर सिंह 44 हजार ही वोट पा सके। जबकि यशवीर सिंह का चुनाव बाद कहना था कि उन्हें सभी वर्गों और धर्मों के करीब 80 हजार वोट मिले हैं।
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ये नेता है सीट से जुड़े
डॉ. राजकुमार सांगवान, सुनील रोहटा, राजेंद्र चिकारा, राजेंद्र जानी, संदीप चौधरी, रणवीर दहिया, विनय मल्लापुर, इंद्रपाल सिंह, राजेंद्र प्रमुख, चौधरी जबर सिंह, भोपाल गुर्जर आदि।
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