पंकज शर्मा ने बताया पत्नी की मौत के कुछ दिनों बाद बेटी आरुषि को उसका मामा विपुल और मामी मनीषा छुट्टियों की बात कहकर साथ ले गए थे। लेकिन उसके बाद बेटी को भेजने से मना कर दिया। उस समय आरुषि की उम्र 12 वर्ष और बेटे पार्थ की उम्र मात्र 5 वर्ष थी।
दोनों बच्चों पर मायके और ससुराल पक्ष के लोग अपना-अपना दावा कर रहे हैं। पिछले चार साल से आरुषि और पार्थ रक्षाबंधन का त्योहार भी नहीं मना रहे थे। लेकिन पिता की गुहार पर बृहस्पतिवार को रक्षाबंधन के त्योहार पर कोर्ट के आदेश पर आरुषि ने न्यायिक अधिकारी के चेंबर में भाई पार्थ को राखी बांधकर रक्षाबंधन मनाया।
बेहद भावुक रहे क्षण
16 साल की आरुषि ने नौ साल के भाई पार्थ को दो राखियां बांधीं और आशीर्वाद के साथ मुंह मीठा कराया। पार्थ कलाई पर बहन का प्यार बंधवाकर बहुत खुश हुआ। इस दौरान वहां मौजूद सभी लोग भावुक हो गए। दो परिवारों के विवाद के बावजूद भाई-बहन के पवित्र रिश्ते की मजबूती को इसी से समझा जा सकता है। पिता पंकज शर्मा ने बताया कि बेटी के 5 अक्तूबर को जन्मदिन पर भी कोर्ट ने बहन-भाई को मिलवाने को कहा था। लेकिन मायके पक्ष कोर्ट में नहीं आया था।
अधर में बच्चों का भविष्य
आरुषि वर्तमान में सोफिया गर्ल्स स्कूल में 11वीं तो पार्थ दीवान पब्लिक स्कूल में चौथी कक्षा में हैं। मां की मौत के बाद दोनों पक्षों के विवाद ने जहां भाई-बहन को अलग कर दिया तो दोनों बच्चों का भविष्य अधर में है।
मायके पक्ष ने की अभद्रता
कचहरी में मीडिया ने मायके पक्ष से बात करने का प्रयास किया तो उन्होंने अभद्रता करनी शुरू कर दी। जिसके बाद मायके पक्ष आरुषि को राखी बंधवाने के बाद वापिस ले गया। एडवोकेट डीडी शर्मा ने बताया पिता पंकज ने बेटी आरुषि की कस्टडी का मामला फैमिली कोर्ट में, जबकि नानी द्वारा संरक्षण में लेने का मामला एडीजे कोर्ट संख्या 15 के यहां विचाराधीन है।