जिले में शिक्षकों ने ऑनलाइन पढ़ाई के लिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर अभिभावकों विद्यार्थियों को जोड़ा। इनमें से करीब 50 प्रतिशत अभिभावक तो स्मार्ट फोन नहीं होने के कारण ग्रुप से नहीं जुड़ सके। ऐसे में शिक्षकों ने उनके किसी रिश्तेदार या परिचितों के नंबर लेकर ग्रुप में जोड़कर अपनी खानापूर्ति तो पूरी कर ली, लेकिन उसका लाभ बच्चे तक नहीं पहुंचा। क्योंकि जिस को ग्रुप में जोड़ा वह व्यक्ति बच्चे के साथ हमेशा नहीं रहता।
ऐसे में ऑनलाइन पढ़ाई के लिए भेजे जाने वाला मैटेरियल बच्चे तक नहीं पहुंच पाता। इसके अलावा जिन अभिभावकों के पास स्मार्ट फोन हैं उनके पास ई-एजुकेशन की समझ नहीं है। बहुत विद्यार्थियों को तो मोबाइल से कैसे पढ़ना है, यह समझ ही नहीं पा रहे हैं।
माता-पिता भी मात्र साक्षर होने के कारण उनकी मदद करने में असहाय रहते हैं। कई गांवों में इंटरनेट कनेक्टिीविटी की समस्या भी रहती है। बच्चे, अभिभावक व शिक्षक भी फिलहाल अवकाश के मूड में हैं। ऑनलाइन एजुकेशन में रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
मोबाइल नंबर ही गलत निकले
सरकारी स्कूल के रिकॉर्ड में से नंबर निकालकर जब व्हाट्सएप ग्रुप पर जोड़ा गया तो कई बच्चों के अभिभावकों के नंबर ही गलत निकले। क्योंकि वे लोग फ्री कॉलिंग के चक्कर में थोड़े दिन में सिम बदल लेते हैं। इसके अलावा कई अभिभावक ग्रुप में जुड़े तो पता लगा कि उनके पास इंटरनेट चलाने के लिए डाटा नहीं है।
शिक्षकों को भी नहीं आ रहा समझ कैसे पढ़ाएं। 50 की उम्र से अधिक के शिक्षक भी स्मार्ट फोन का उपयोग ठीक से नहीं कर पा रहे हैं। ई-एजुकेशन उन्हें भी समझ नहीं है। सभी बस सामग्री को एक से दूसरे ग्रुप में फॉरवर्ड कर इतिश्री कर रहे हैं।
काम मुश्किल पर प्रयास जारी
जिला विद्यालय निरीक्षक गिरजेश चौधरी का कहना है कि माध्यमिक शिक्षा परिषद के निर्देशानुसार व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर ऑनलाइन पढ़ाई कराई जा रही है। ग्रामीण इलाका होने के कारण परेशानी तो है ही, फिर भी पूरा प्रयास किया जा रहा है कि लॉकडाउन के समय का उपयोग किया जा सके।