पीडब्लूडी में सिंगल रिसीविंग टेंडर का जबरदस्त खेल सामने आया है। सीएम योगी के निर्देश पर शहर की सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के लिए डाले गए टेंडरों में से 65 मामलों में मात्र एक ही व्यक्ति ने आवेदन किया है। यानी कोई प्रतिस्पर्धा नहीं होने के कारण जो चाहे रेट तय किए जा सकते हैं। ऐसे में टेंडर के लिए आवेदन करने वाले को ही यह मिलना तय है। उधर, कांट्रेक्टर एसोसिएशन ने इसे धांधली बताया है। साथ ही निविदाओं का बहिष्कार कर कहा है कि इसकी शिकायत सीएम तक से की जाएगी।
यह है लक्ष्य
सूबे में इन दिनों सड़कों को गड्ढा मुक्त करने की कवायद चल रही है। सीएम योगी ने साफ कहा है कि 15 जून तक सभी सड़कें गड्ढा मुक्त हो जाएं। ऐसा न करने वाले विभागों पर एक्शन होगा। यही कारण है कि एमडीए, नगर निगम, आवास विकास और पीडब्ल्यूडी मुख्य रूप से इस काम में जुटे हैं। आवास विकास, एमडीए और नगर निगम की टीम केवल शहर में ही काम करेगी। मेरठ में लोनिवि को पूरे जनपद में काम करना है। ऐसे में सौ से ज्यादा छोटी बड़ी सड़कों के टेंडर होने हैं।
10 करोड़ के टेंडर में एक-एक आवेदन कर्ता
निविदाओं में अब तक दोनाें डिवीजन में लगभग 65 टेंडर ऐसे हैं, जिनमें एक-एक ही कांट्रेक्टर ने आवेदन किया है। 10 करोड़ रुपये से ज्यादा के यह काम हैं। यानी सिंगल रिसीव टेंडर पर ही इन्हें मंजूरी दी जा रही है। यह हाल तब है जबकि दो या तीन कांट्रेक्टर के बीच किसी एक टेंडर को लेकर यदि कंप्टीशन या आवेदन है तो उसे भी निरस्त किया जाता रहा है। यह कहकर कि मात्र तीन कांट्रेक्टर के बीच टेंडर के लिए फाइट नहीं होगी। ज्यादा कांट्रेक्टर आएंगे तभी टेंडर निकाला जाएगा ताकि कम दाम में सही काम हो सके। नियत दर से कम पर भी टेंडर लेने की होड़ रही है पर अब तो बढ़ाकर दर तय करने की बात कही जा रही है।
कर दिया बहिष्कार का एलान
इन टेंडर के विरोध में कांट्रेक्टर्स एसोसिएशन ने बहिष्कार का एलान कर दिया है। पदाधिकारियों का कहना है कि बिना प्रतिस्पर्धा के कैसा टेंडर?। जब एक ही व्यक्ति आवेदन कर रहा है तो प्रकिया रद्द होनी चाहिए। आरोप है कि सभी को टेंडर डालने का मौका ही नहीं दिया गया। प्रक्रिया गुपचुप तरीके से शुरू करके मनपसंद ठेकेदारों से ही टेंडर डलवाया गया है। सीएम से शिकायत करने की बात कही जा रही है।
महंगाई का रो रहे रोना
लोनिवि अधिकारी कह रहे हैं कि इस समय महंगाई बहुत है। कांट्रेक्टर्स को मैटीरियल नहीं मिल रहा है। बोल्डर महंगा है। ढुलाई बढ़ गई है। ऐसे में कांट्रेक्टर खुद ही टेंडर नहीं डाल रहे हैं। चूंकि प्रक्रिया ऑनलाइन है तो किसी को रोका नहीं गया है। अधिकारियों का कहना है कि जितने टेंडर आ चुके हैं उतने ही अभी और भी हैं जिनमें किसी ने भी भाग नहीं लिया है।
हमें तो हर सूरत में 15 जून तक सीएम केआदेश का पालन करते हुए सड़कों को गड्ढामुक्त करना है। जो कांट्रेक्टर बहिष्कार कर रहे हैं वे खुद टेंडर डाल नहीं रहे हैं। जिन्होंने टेंडर डाला है, उनके कैंसिल करने की बात की जा रही है। यह बात सही है कि सिंगल रिसीव टेंडर हैं पर हमारे पास इसके अलावा विकल्प नहीं है। काम तो करना ही पड़ेगा - यूके गहलौत, चीफ इंजीनियर पीडब्लूडी।
यह प्रक्रिया पूरी तरह से गलत है। जिस काम में केवल एक ही टेंडर आया हो और उसे ही स्वीकार कर लिया जाए तो यह साफ गड़बड़झाला है। जो चाहे जिसे रेट दे दो क्योंकि प्रतिस्पर्धा तो है ही नहीं। हमने इस प्रक्रिया का बहिष्कार करते हुए दोबारा टेंडर डालने की मांग की है। संदीप चौधरी, अध्यक्ष कांट्रेक्टर एसोसिएशन