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इलेक्ट्रानिक साजों पर सजा रहे संगीत की धुन

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इलेक्ट्रा​नक साज पर अ​भ्यास करती छात्रा
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मेरठ।
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संगीत के शौकीन युवाओं में अब इलेक्ट्रानिक साजों पर आवाज निखारने का चलन बढ़ा है। संगीत की कक्षाओं में अब हारमोनियम, तबले के साथ इलेक्ट्रानिक तानपुरा, वीणा और सितार भी खूब बज रहा है। युवाओं में साज के प्रति संजीदगी बेशक कम हुई है, लेकिन गायन का शौक नहीं घटा। गायन के इसी शौक के कारण इलेक्ट्रानिक साजों की मांग और प्रचलन में वृद्धि हुई है। संगीत की कक्षाओं में बच्चे व युवा लीड लगाकर इन्हीं इलेक्ट्रानिक उपकरणों पर संगीत की शिक्षा ले रहे हैं।
इलेक्ट्रानिक साजों की बात करें तो बाजार में सबसे पहले तानपुरे का इलेक्ट्रानिक वर्जन आया। इसके बाद सितार, वीणा और तबले को भी इसमें ढाला गया। युवाओं के लिए साजों के ये इलेक्ट्रानिक वर्जन संगीत सीखने का सरल माध्यम बन गए हैं। सुरों क ो साधने के लिए युवा इन पर ही रियाज करते हैं। इसके चलते उन्हें हर समय उस्ताद की जरूरत नहीं होती। इसी वजह से युवा इन इलेक्ट्रानिक वर्जन को ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
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सीखने और रखने में आसान
सितार, तानपुरा, वीणा, तबला से लेकर लगभग सभी साज के इलेक्ट्रानिक वर्जन बाजार में आसानी से उपलब्ध हैं। युवा इन्हें काफी प्रयोग कर रहे हैं, वजह ये उपकरण रखने और साथ ले जाने में बेहद आसान हैं। बिजली से चार्ज करने पर ये उपकरण 12 से 15 घंटे तक बैकअप देते हैं। साज की आवाज को जरूरत के मुताबिक धीमा और तेज कर सकते हैं। इन उपकरणों में पूरी सरगम, सभी तालें, सुरों का उतार-चढ़ाव व हरकतों का पूरा संग्रह है। संगीत से जुड़े किसी भी प्रकार के रियाज में इनका बखूबी मेल किया जा सकता है। स्टेज पर प्रस्तुति देने में भी इनका काफी प्रयोग हो रहा है। इनके कारण संगीत सीखने में सुगमता बढ़ी है।
रियाज के जरूरी वाद्ययंत्र
युवाओं की रुचि भारतीय वाद्य यंत्रों को सीखने में काफी कम है। तबला छोड़कर अन्य किसी भी भारतीय वाद्य यंत्र की शिक्षा युवा नहीं ले रहे, लेकिन सुरों के रियाज के लिए हारमोनियम, वीणा, तानपुरा अहम हैं। इसलिए इलेक्ट्रानिक वर्जन बजाकर रियाज करते हैं।
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राकेश जौहरी, संगीत शिक्षक
इलेक्ट्रानिक साजों की बढ़ी मांग
भारतीय साजों में युवाओं की घटती रुचि के साथ इन्हें बखूबी बजाने वाले उस्तादों की संख्या में कमी आ रही है। स्कूल, कॉलेजों में बहुत ही कम युवा मिलते हैं जो सितार या तानपुरा को बखूबी बैठा सकें, उस पर तान को सेट कर सकें। इसलिए इलेक्ट्रानिक साजों की मांग बढ़ी है। स्टेज प्रस्तुति में भी इनका प्रयोग हो रहा है। -डॉ. रेखा सेठ, रिटायर्ड एचओडी संगीत विभाग, इस्माईल पीजी कॉलेज
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