सीसीएसयू में कॉपियों की जांच में गड़बड़ी और मार्कशीट-डिग्री जारी करने में देरी का आरोप लगा बिफरे छात्र
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में कॉपियों की जांच में गड़बड़ी, मार्कशीट-डिग्री जारी करने में हो रही देरी आदि समस्याओं को लेकर छात्रों का गुस्सा फूट गया। छात्र संघ के पूर्व महामंत्री अंकित अधाना के नेतृत्व में दर्जनों छात्र-छात्राओं ने विश्वविद्यालय परिसर में प्रदर्शन करते हुए परीक्षा नियंत्रक कार्यालय का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए चेतावनी दी कि यदि जल्द समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
घेराव के दौरान छात्रों ने परीक्षा नियंत्रक अमित कृष्ण यादव के समक्ष विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। पूर्व छात्र संघ महामंत्री अंकित अधाना ने आरोप लगाया कि उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में भारी लापरवाही बरती जा रही है, जिसका सीधा असर छात्रों के भविष्य पर पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि कई छात्रों की कॉपियों के पहले पृष्ठ पर कम अंक दर्ज किए गए, जबकि अंदर के पन्नों में कुल अंक उससे कहीं अधिक हैं। ऑनलाइन जारी परिणाम और विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड चार्ट में भी अंकों में भारी अंतर है।
अंकित अधाना ने बुलंदशहर निवासी छात्र साहिब का मामला उठाते हुए बताया कि वह कई महीनों से अपनी मार्कशीट में सुधार कराने के लिए विश्वविद्यालय के चक्कर काट रहा है। प्रशासनिक देरी के चलते उसकी नौकरी तक चली गई, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। छात्रा ज्योति को रिजल्ट में उसे केवल 23 अंक दिए गए, जबकि उसकी उत्तर पुस्तिका 35 अंक दर्ज हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन को सभी समस्याओं के समाधान के लिए एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया है। प्रदर्शन में अंकित अधाना, शान मुहम्मद, रोहित बावरा, अजय चौधरी सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
ईद के परीक्षा, एलएलबी के छात्रों को फेल करने पर भड़के
प्रदर्शन के दौरान छात्र नेता शान मुहम्मद ने ईद के दिन परीक्षा होने पर आपत्ति जताते हुए परीक्षा तिथि आगे बढ़ाने की मांग की। छात्र नेता रोहित बावरा ने एलएलबी के छात्रों को बड़ी संख्या में फेल करने का मुद्दा उठाते हुए प्रभावित छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं का दोबारा पुनर्मूल्यांकन कराने की मांग रखी। इस दौरान छात्रों और अधिकारियों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। छात्रों ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय में जानबूझकर छात्रों को फेल किया जा रहा है ताकि वे मजबूरी में स्क्रूटनी फॉर्म भरें और विश्वविद्यालय को आर्थिक लाभ हो सके।