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अहंकार से दूर रहकर आत्मकल्याण का मार्ग अपनाएं : सौम्य सागर

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- मुनि सौम्य सागर ने कई जैन मंदिरों में किया विहार
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। जैन मुनि सौम्य सागर महाराज ने तीरगरान, कमलानगर, पंजाबीपुरा, महावीर जयंती और शारदा रोड स्थित जैन मंदिरों का विहार किया। प्रत्येक मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उनके दर्शन एवं प्रवचन सुनने के लिए पहुंचे। मुनि ने आत्मकल्याण, संयम और वैराग्य का संदेश दिया। उन्होंने अहंकार से दूर रहकर आत्मकल्याण के लिए मार्ग अपनाने को कहा। इसके बाद वे अपने विराजमान स्थल पर लौटे।
कार्यक्रम का संचालन इंदौर से आईं बहन सुधा मलैया ने किया। मुनि सौम्य सागर महाराज का आहार पुरानी प्रेमपुरी में और मुनि निश्चल सागर जी महाराज का आहार रानी मिल में संपन्न हुआ। मुनि ने कहा कि लोभ से अति लाभ की तृष्णा विष और अग्नि के समान है।
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उन्होंने कहा कि मनुष्य को स्वयं को कर्ता, भोक्ता और स्वामी मानने के अहंकार से बचना चाहिए। संसार की कोई भी संपत्ति स्थायी नहीं है। एक दिन सब कुछ यहीं छोड़कर जाना है। उन्होंने कहा कि अपेक्षाओं और उम्मीदों की दलदल में फंसकर मनुष्य अपने आत्मिक विकास को कमजोर करता है। सुख एवं शांति आत्म निरीक्षण और आत्म अनुशासन से प्राप्त होते हैं।
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उन्होंने जैन मुनियों की पीछी का महत्व बताते हुए कहा कि यह आशीर्वाद देने का साधन नहीं। जीव दया और सूक्ष्म जीवों की रक्षा का उपकरण है। मुनि जहां भी बैठते हैं उससे पहले उस स्थान का परिमार्जन करते हैं। किसी भी सूक्ष्म जीव की हिंसा न हो। उन्होंने आहार दान की महिमा बताते हुए भगवान आदिनाथ के जीवन प्रसंग का उल्लेख किया और कहा कि शुद्ध भाव से तैयार किया गया आहार तथा उसकी पवित्र भावना ही सच्चे पुण्य का कारण बनती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपने आत्मस्वरूप की पहचान कर वीतराग मार्ग पर चलने का आह्वान किया। इस अवसर पर सरधना जैन समाज और पल्लवपुरम जैन समाज के श्रद्धालुओं ने चातुर्मास के लिए श्रीफल अर्पित किया। कार्यक्रम में वीरेंद्र जैन, संजय कलश, राकेश संजय, सुनील प्रवक्ता, अनिल चेतन तथा सकल जैन समाज के लोग रहे।
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