उन्होंने बताया कि हिंदू धर्म के अनुसार मुर्दे को जो सफेद कपड़े पहनाए जाते हैं, वह शव के साथ ही चिता में जला दिए जाते हैं। मुस्लिम समाज के लोग भी शव को कफन के साथ ही कब्र में दफना देते हैं। हिंदू समाज की परंपरा के अनुसार मुर्दे के ऊपर परिजन और रिश्तेदार जो कपड़े डालते हैं, वह शमशान में जमादार को दिया जाता है या फिर श्मशान में रहने वाले पंडित आचार्य ले लेते हैं।
उन्होंने कहा कि पुलिस ने किसी भी थाने में कफन चोरी से जुड़ा कोई भी मामला दर्ज होना स्वीकार नहीं किया है। इससे लगता है कि साजिश के तहत कफन चोर बताकर उनके परिवार को बदनाम किया गया है। महामारी फैलाने का भी गलत आरोप लगाया गया है।
महिला के अनुसार प्रदेश सरकार के नियमानुसार कोविड संक्रमित शव अस्पताल से ही पैक कर सीधे श्मशान में अथवा कब्रिस्तान पहुंचाया जाता है। अंतिम संस्कार के समय कोई कपड़ा अर्थी या जनाजे पर नहीं होता है। ऐसे हालात में कफन चोरी कर कोई कैसे कोरोना संक्रमण फैला सकता है। उन्होंने इस मामले में पुलिस की भूमिका सहित निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। एडीजी ने जांच कर उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।