शिवरात्रि 21 जुलाई को है। इस दिन भगवान भोलेनाथ का पूजन करने से विशेष फल मिलेगा। कांवड़िये और सामान्य शिव भक्त त्रयोदशी में भगवान आशुतोष का जलाभिषेक कर सकते हैं। रात्रि 9:50 बजे के बाद चतुर्दशी का जल चढ़ाया जाएगा।
इस संबंध में ज्योतिषी पं. विनोद त्यागी का कहना है कि त्रयोदशी 20 जुलाई की रात्रि 1 बजकर 13 मिनट से प्रारंभ होकर 21 जुलाई की रात्रि 9:50 बजे तक रहेगी। इसके उपरांत चतुर्दशी शुरू होगी। जो 22 जुलाई की शाम 6:28 बजे तक रहेगी। इनका कहना है कि 21 जुलाई को सूर्योदय के बाद यानी सुबह 5:40 बजे से भगवान शिव की पूजा शुरू होगी। सुबह से अगले दिन यानी 22 जुलाई की शाम 6:28 बजे तक पूजा का शुभ मुहूर्त रहेगा। इस बीच की गयी पूजा विशेष होगी। भगवान भोले नाथ की सच्चे मन से की गयी पूजा का फल मिलेगा। 21 जुलाई की सुबह से त्रयोदशी का जल चढ़ाया जाएगा। जबकि रात्रि 9:50 के बाद शिवरात्रि का जलाभिषेक शुरू होगा। इसमें कांवड़िये और सामान्य शिवभक्त जलाभिषेक करेंगे।
जगमग हुए शिवालय, फूलों से सजावट
शिवरात्रि पर जलाभिषेक के लिए शिवालय सजकर तैयार हो गए हैं। आकर्षक लाइटिंग के साथ ही शिवालयों को फूलों से सजाया गया है। बाबा औघड़नाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष डॉ. महेश बंसल और महामंत्री सतीश सिंहल का कहना है कि शिवरात्रि पर मंदिर 20 और 21 जुलाई को पूरी रात खुला रहेगा। क्योंकि जहां कुछ शिवभक्त त्रयोदशी का जल बाबा औघड़नाथ मंदिर में चढ़ाते हैं। वहीं सामान्य शिव भक्त भी त्रयोदशी और चतुर्दशी पर भगवान भोलेनाथ की पूजा करने पहुंचते हैं।
समिति पदाधिकारियों के अनुसार रात्रि में चार बजे मंदिर के कपाट खोले जाएंगे और भगवान की आरती होगी। शिव भक्तों की सुविधा के लिए जहां मंदिर समिति के सभी सदस्य शिवभक्तों की सेवा में रहेेंगे, वहीं सिविल डिफेंस, पुलिस भी रहेगी। मंदिर के आसपास पूरी तरह सेना का पहरा है। मंदिर के निजी कैमरे अपडेट हैं। जिन पर मंदिर की निगरानी की जाएगी। उधर मंदिर के मुख्य पुजारी पं. श्रीधर त्रिपाठी का कहना है कि मंदिर के कपाट खुलते ही भगवान का जलाभिषेक और पूजन शुरू हो जाएगा। डेढ़ लाख से ज्यादा कांवड़ियों के पहुंचने की उम्मीद है। मंदिर समिति की तरफ से सभी व्यवस्था दुरुस्त हैं।