51 लीटर पवित्र जल वाली कलश कावड़ का अभ्यास करते युवा स्रोत संवाद
हस्तिनापुर। समय के साथ-साथ हमारी प्राचीन और पौराणिक परंपराओं में भी बदलाव देखा जा रहा है। श्रद्धा और आस्था की प्रतीक एवं भगवान भोलेनाथ को समर्पित पवित्र कांवड़ यात्रा में भी कई बदलाव देखने को मिल रहे हैं। शिवभक्त कांवड़ यात्रा पर लाखों रुपये खर्च कर रहे हैं। कांवड़ के साथ-साथ अपने वजन से अधिक पवित्र गंगाजल लाने का रुझान भी बढ़ता जा रहा है। युवाओं में आस्था के चलते अपने वजन से भी अधिक गंगाजल लाने के लिए तैयारियों में जुटे हुए हैं।
हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लाने के लिए कांवड़ यात्रा में कोई परेशानी न हो, इसके लिए युवा पिछले कई दिनों से अभ्यास कर रहे हैं। वह यात्रा को सुगम बनाने के लिए अपने शरीर को परिस्थितियों में ढालने का प्रयास कर रहे हैं। भगवान भोलेनाथ की आस्था के चलते बांस के डंडों पर दोनों ओर 51 किलो या उससे अधिक वजन बांधकर वह सुबह-शाम कड़ा अभ्यास कर रहे हैं।
कलश कांवड़ इस समय शिवभक्त युवाओं की पहली पसंद बनी हुई है। कलश यात्रा लाने का अभ्यास कर रहे कस्बे के आकाश, शिवम, मोंटी आदि ने बताया कि जिस कांवड़ को इस बार वह हरिद्वार से उठाएंगे, उनका वजन सौ किलो से अधिक होगा। उनके साथ कुछ युवा कलश कांवड़ लेंगे, जिसमें 51 लीटर से अधिक पवित्र गंगाजल होगा। जिसका वह कई दिनों से अभ्यास कर रहे हैं।