अब्दुल्लापुर में मजलिस में मौजूद लोग, सड़कों पर मातम करते लोग।
शिया मुसलमान ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई की मौत से गमजदा हैं। उन्होंने रविवार को अब्दुल्लापुर से लेकर शहर, मवाना, खिर्वा, रसूलपुर धौलड़ी और सरधना में जुलूस निकाला, घरों पर काले झंडे लगाए और मजलिसें कीं। अब्दुल्लापुर में बड़ी संख्या में लोग काले कपड़े पहनकर सड़कों पर उतरे। उन्होंने गढ़ी स्थित इमामबारगाह से हुसैनी चौक तक जुलूस निकाला। जुलूस में बच्चे भी शामिल हुए।
जुलूस में शामिल लोग खामनेई के फोटो हाथ में लिए हुए थे और लगातार अमेरिका और इस्राइल के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। सुप्रीम लीडर को ईरान में रहबर (मार्गदर्शक) कहा जाता है। अपने इसी रहबर की मौत पर अब्दुल्लापुर में आयोजित मजलिसों में अमेरिका और इस्राइल के खिलाफ गुस्सा दिखा। डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ भी नारेबाजी की गई। खामनेई तेरे नाम पर जान भी कुर्बान है और कितने खामनेई मारोगे, हर घर से खामनेई निकलेगा जैसे नारे लगाए गए। इसके अलावा शहर की विभिन्न इमामबरगाहों में मजलिसों का दौर चला। इमामबारगाह पंजतनी, दरबार ए हुसैनी और शाह जलाल हॉल में मजलिसें हुईं। वहीं, नवाब जैदी के यहां महिलाओं की मजलिस हुई।
इमामबारगाह पंजतनी के मुतवल्ली खुर्शीद जैदी ने बताया कि इन सभी मजलिसों में अमेरिका और इस्राइल की कार्रवाई को कायराना हरकत बताया गया। मोहर्रम कमेटी के मीडिया प्रभारी अली हैदर रिजवी ने बताया कि सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई की मौत पर मेरठ के शिया मुसलमान तीन दिनों का शोक रखेंगे और तीनों दिन मजलिसों का आयोजन किया जाएगा।
कैंडल मार्च को पुलिस ने रोका, लोगों को वापस लौटना पड़ा
रेलवे रोड स्थित वक्फ मनसबिया प्रशासन की ओर से भी विरोध प्रदर्शन की तैयारी थी। यहां रविवार शाम 4 बजे कैंडल मार्च से इसकी शुरुआत होनी थी लेकिन पुलिस ने आयोजकों से वार्ता कर त्योहारी सीजन का हवाला दिया और प्रदर्शन को स्थगित करवा दिया। वक्फ मनसबिया के पूर्व मुतवल्ली दानिश जाफरी ने बताया कि प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद इकट्ठा हुए सभी लोगों को वापस भेज दिया गया। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मेरठ की शिया आवाम अपने लीडर की कुर्बानी से बुरी तरह आहत है और सही समय पर तथा प्रशासन से इजाजत लेकर अपना विरोध दर्ज कराएगी।