मौलाना सईद अहमद पालनपुरी का संक्षिप्त परिचय
अपनी जिंदगी के 56 सालों तक इस्लाम की खिदमत करने वाले बुजुुर्ग आलिम ए दीन शेखुल हदीस मौलाना सईद अहमद पालनपुरी का जन्म सन् 1940 में गुजरात के एक छोटे से गांव कालेड़ा जिला बनास कोठा में मौलाना यूसुफ के यहां हुआ था।
शुरूआती तालिम मौलाना ने वहीं प्राप्त की। इसके बाद मजाहिर उलूम सहारनपुर में दाखिला लिया और आगे की शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद देवबंद तशरीफ लाए और सन् 1962 में दारुल उलूम देवबंद से मौलवियत की डिग्री हासिल की।
इसके बाद सन् 1964 से 1973 तक गुजरात के सूरत में स्थित दारुल उलूम अशरफिया रानदेर में बतौर उस्ताद पढ़ाने का सिलसिला शुरू किया। सन् 1973 में ही मौलाना की दारुल उलूम में नियुक्ति हो गई। तबसे ही विभिन्न पदों पर रहते हुए आप अपनी सेवाएं दे रहे।
बिना तनख्वाह दीन की खिदमत
दारूल उलूम के शेखुल हदीस, सदर मुदर्रिस (मुख्य उस्ताद) और संस्था की सुप्रीम पावर कमेटी मजलिस-ए-शुरा के सदस्य मौलाना सईद अहमद पालनपुरी ने जिंदगी भर नि:स्वार्थ भाव से दीन की खिदमत (सेवा) को अंजाम दिया।
50 साल तक अलग अलग पदों पर सेवाएं देने वाले मौलाना पालनपुरी ने करीब 10 वर्ष पूर्व संस्था से अब तक ली गई सारी तनख्वाह वापस लौटा दी थी। तबसे ही वह बिना तनख्वाह दारुल उलूम में अपनी सेवाएं दे रहे थे। मौलाना को उनकी अमूल्य सेवाओ के लिए हमेशा याद किया जाता रहेगा।