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शारदीय नवरात्र रविवार से: इस बार गज पर पधारेंगी मां भवानी; दस दिन पूजा और दो दिन अष्टमी का संयोग

Fri, 09 Oct 2026 11:15 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

शारदीय नवरात्र रविवार से शुरू होंगे। मान्यता है कि इस बार मां दुर्गा गज यानी हाथी पर सवार होकर आएंगी, जिसे वर्षा और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। घटस्थापना के लिए सुबह 6:51 बजे तक, 9:15 से 11:30 बजे तक और अभिजीत मुहूर्त में 11:43 बजे से दोपहर 12:38 बजे तक शुभ समय बताया गया है।
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नवरात्रि नौ दिन नौ देवी पूजन - फोटो : AI
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विस्तार
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शारदीय नवरात्र इस बार रविवार से शुरू हो रहे हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस बार भक्तों को नौ के बजाय दस दिन तक मां भगवती की आराधना का अवसर मिलेगा। अष्टमी तिथि दो दिन रहने का संयोग भी बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रविवार को नवरात्र शुरू होने पर मां दुर्गा का वाहन गज यानी हाथी माना जाता है, जो वर्षा, अन्न-धन, सुख और समृद्धि का प्रतीक है। घटस्थापना के लिए दिन में अलग-अलग शुभ मुहूर्त बताए गए हैं।

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गज पर मां के आगमन की मान्यता, वर्षा और समृद्धि का प्रतीक
ज्योतिषाचार्य विनोद त्यागी ने बताया कि इस बार नवरात्र में नौ के बजाय दस दिन तक मां भगवती की आराधना और व्रत का अवसर मिलेगा। मान्यता के अनुसार, रविवार से नवरात्र शुरू होने पर मां दुर्गा गज यानी हाथी पर सवार होकर आती हैं। धार्मिक परंपरा में हाथी को वर्षा, अन्न-धन, सुख और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

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घटस्थापना के लिए ये हैं शुभ मुहूर्त
आचार्य मनीष स्वामी के अनुसार, ज्योतिष शास्त्र में द्विस्वभाव लग्न में घटस्थापना करना शुभ माना गया है। इस बार घटस्थापना के लिए कन्या लग्न में सूर्योदय से सुबह 6:51 बजे तक और वृश्चिक स्थिर लग्न में सुबह 9:15 से 11:30 बजे तक का समय बताया गया है। वहीं, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:43 बजे से दोपहर 12:38 बजे तक रहेगा। इस अवधि में घटस्थापना करना विशेष शुभ माना जाता है।

दुर्गाष्टमी, महानवमी और विजयादशमी की तिथियां
इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस के सचिव आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि 19 अक्टूबर को श्री दुर्गाष्टमी और 20 अक्टूबर को महानवमी मनाई जाएगी। इसी दिन विजयादशमी का पर्व भी मनाया जाएगा। अष्टमी तिथि दो दिन रहने का संयोग इस बार नवरात्र की विशेषता के रूप में बताया गया है।
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जौ बोने की परंपरा, पूजा के लिए इन सामग्रियों की जरूरत
आचार्य कौशल वत्स के अनुसार, नवरात्र में जौ बोने की परंपरा है। जौ को ब्रह्म स्वरूप और पृथ्वी की पहली फसल माना गया है। घटस्थापना में कलश सुख-समृद्धि, वैभव और मंगलकामना का प्रतीक होता है। पूजा के लिए कलश, गंगाजल, रोली, मौली, सुपारी, लौंग-इलायची, पान, दूर्वा, सिक्के, पंचरत्न, आम या अशोक के पत्ते, नारियल, लाल कपड़ा, फूल-माला, फल, पंचमेवा और अखंड ज्योति सहित अन्य सामग्री की आवश्यकता होती है।
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