इस बीच वहां मौजूद संघ पदाधिकारी विनोद भारती ने विरोध जताते हुए कहा कि रामलाल अविवाहित हैं, उनकी भतीजी की शादी थी, जिसमें प्रधानमंत्री पहुंचे। उन्होंने कहा कि आपको ऐसा नहीं बोलना चाहिए। इस पर शंकराचार्य भड़क गए। उन्होंने कहा कि संघियों का यही रवैया है। अब तुम मुझे सिखाओगे, मुझे क्या बोलना चाहिए। मैंने कुछ गलत नहीं बोला है।
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वहीं, इस गहमा-गहमी को लोगों ने हस्तक्षेप कर शांत कराया। तभी 10 मिनट बाद भाजपा सांसद राजेंद्र अग्रवाल भी शंकराचार्य के दर्शन को पहुंच गए। इस बीच उन्होंने विवाद के विषय में बात करना चाहा तो शंकराचार्य उन पर भी भड़क गए।
इस पर आग बबूला हुए सांसद ने कहा कि मैं आपको भी सन्यासी मानने से इंकार करता हूं। इस बीच दोनों में तीखी बहस हुई। इसके बाद शंकराचार्य के सेवकों ने सांसद को खींचकर कमरे से बाहर निकाल दिया।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रवक्ता अभिमन्यु त्यागी ने कहा कि पूज्य शंकराचार्य हिंदू धर्म में सर्वोच्च्य पद पर हैं। अहंकार में डूबे भाजपा सांसद और मुट्ठी भर संघ पदाधिकारियों द्वारा पूज्य शंकराचार्य जी से बहस कर समस्त हिंदू धर्म के अनुयायियों का अपमान किया है। मेरठ सांसद यह बात भूल रहे हैं कि रावण को उनका अहंकार ले बैठा था। सांसद ने हिंदू धर्म का अपमान किया है। भाजपा के किसी भी नेता से लेकर संघ चीफ मोहन भागवत के पास इतना ज्ञान नहीं है कि वो पूज्य शंकराचार्य से हिंदू धर्म और देश से जुड़े मुद्दों पर बहस कर सकें। मेरठ सांसद को पूज्य शंकराचार्य जी से और हिंदू धर्म के अनुयायियों से माफी मांगनी चाहिए।