पुलिस जांच के बाद भी नहीं मिला वाहन
पुलिस ने मामले की जांच की, लेकिन चोरी हुए वाहन का कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद 29 अप्रैल 2019 को न्यायालय में अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी गई। परिवादी ने बीमा कंपनी के समक्ष बीमा दावा प्रस्तुत किया और कई बार कार्यालय जाकर भुगतान की मांग की, लेकिन कंपनी ने दावा देने से इनकार कर दिया।
आयोग ने सुनाया भुगतान का आदेश
मामले की सुनवाई के बाद आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार गुप्ता और सदस्य अमरजीत कौर ने परिवाद स्वीकार करते हुए बीमा कंपनी को भुगतान का आदेश दिया।
आयोग ने बीमा कंपनी को निर्देश दिया कि वह बीमा दावा राशि 13 लाख 50 हजार रुपये पर छह प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज सहित भुगतान करे। इसके अलावा परिवाद व्यय के रूप में दस हजार रुपये, शारीरिक, मानसिक और आर्थिक क्षति के लिए दो लाख रुपये तथा अनुचित व्यापार व्यवहार के लिए एक लाख रुपये का अर्थदंड अदा करने का आदेश दिया गया। आयोग ने यह भी निर्देश दिया कि अर्थदंड की राशि नियमानुसार राजकोष में जमा कराई जाएगी।