पूर्वी यमुना नहर के किनारे कलक्ट्रेट के अनावासीय भवनों का डिजाइन में मनमाने तरीके से बदलाव करने और खर्च बढ़ाने के मामले में अनुशासनात्मक कार्रवाई में फंसे पूर्व डीएम ओपी वर्मा ने अपने बचाव में तर्क दिए हैं। कहा है कि सुरक्षा कारणों से भवनों का डिजाइन बदला गया था। सवाल उठाया कि परिवर्तित नक्शा शासन ने स्वीकृत क्यों किया? डिजाइन पंसद नहीं था तो निर्माण के लिए धनराशि जारी क्यों की?
इस नवसृजित जिले को कलेक्ट्रेट के लिए गोहरनी गांव के जंगल में एक मंजिला भवन के निर्माण की स्वीकृति शासन से मिली थी। नियमानुसार एक मंजिला भवन में आरसीसी कालम नहीं होते हैं। इसमें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और कंप्यूटर रूम का प्राविधान भी नहीं था। भूमि के पास पूर्वी यमुना नहर की ऊंचाई भी भैंसवाल से लेकर मुंडेट कलां गांव तक ढ़ाई मीटर है।
अधिकारियों का तर्क है कि पूर्वी यमुना नहर का तटबंध टूटने की स्थिति में एक मंजिला भवन को डूबने और राजस्व रिकार्ड को नष्ट होने से नहीं बचाया जा सकता था। तब खनन पर शासन से प्रतिबंध होने के कारण भूमि पर भराव के लिए मिट्टी उपलब्ध होना कठिन था।