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शाकिब ने ही ट्रेन में किया था फराह फैज पर हमला, एनआईए की पूछताछ में बड़ा खुलासा

Tue, 01 Jan 2019 01:20 AM IST
शाहरुख खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
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वरिष्ठ अधिवक्ता फराह फैज - फोटो : अमर उजाला
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तीन तलाक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में वाद दायर करने वाली अधिवक्ता फराह फैज ने आरोप लगाया है कि एनआईए द्वारा गिरफ्तार संदिग्धों में शामिल एक संदिग्ध ने ही उन पर वर्ष 2016 में ट्रेन में हमला किया था। उनसे कहा था कि कुछ सिरफिरी औरतें यह समझतीं हैं कि वह शरीयत को बदल देंगी। फराह फैज ने कहा कि उन्होंने उसे पहचान तो पहले ही लिया था, लेकिन नाम नहीं मालूम था।
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सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता नगर कोतवाली क्षेत्र के प्रताप नगर निवासी फराह फैज एसएसपी दिनेश कुमार से मिलीं। उन्होंने एसएसपी को पूरे मामले की जानकारी दी और इस प्रकार की संस्थाओं को ही उन पर हमले के लिए जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा कि एनआईए द्वारा पकड़े गए दस संदिग्धों में एक संदिग्ध को उन्होंने पहचान लिया है। उसकी शक्ल तो उन्होंने पहले ही पहचान ली थी, लेकिन उसका नाम नहीं जानती थी। 

उसका नाम समाचार पत्रों से पता चला है कि वह हापुड़ का रहना वाला शाकिब है। शाकिब ने ही अपने एक साथी के साथ मिलकर 2016 में निजामुद्दीन से सहारनपुर आते समय गोल्डन टेंपल ट्रेन में उन पर हमला किया था। उनको कहा था कि कुछ सिरफिरी औरतें यह समझतीं हैं कि शरीयत को बदल देंगी।
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 पहचान करने के बाद उन्होंने हमले के मामले की जांच कर रहे निजामुद्दीन थाना के जांच अधिकारी शिवचरन मीणा को 161 के अपने बयान दर्ज करा दिए हैं। उन्होंने बताया कि यह भी पता चला है कि शाकिब किसी मस्जिद में इमामियत करता है। फराह फैज का कहना है कि उस पर हमला इसलिए किया गया था क्योंकि वह तीन तलाक के खिलाफ लड़ाई लड़ रही हैं। 

उन्होंने कहा कि एक बार उन्होंने उसे देवबंद में भी देखा था और कहा था कि वह वहां का छात्र है। वहां प्रवेश पाने वाले सभी का फोटो दिखाया जाए तो वह पहचान लेंगी, लेकिन उन्हें फोटो नहीं दिखाए गए। 

उन्होंने कहा कि शाकिब ने उन आकाओं के इशारे पर उस पर हमला किया जो शरीयत का हवाला देकर मुस्लिम महिलाओं का उत्पीड़न करने में लगे हुए हैं और नहीं चाहते कि उनकी यह दुकान बंद हो जाए।   एसएसपी दिनेश कुमार का कहना है कि मामले की जांच एनआईए कर रही है। उस मामले में एनआईए के अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा।

मजहब के नाम पर जहर घोल रहे आतंकियों का साथ देने वाले
फराह फैज ने कहा कि वह पहले से ही कह रहीं थी कि उन पर हुए हमले में कहीं न उन मदरसों का हाथ है या उन संस्थाओं का हाथ है जो समाज में मजहब के नाम पर जहर घोल रहे हैं और मासूमों को आतंकवाद के रास्ते पर ला रहे हैं। अब उनकी यह बात सिद्ध भी हो गई है। 

क्योंकि एक संगठन उन लोगों के पक्ष में खुलकर सामने आया है। यह कहा है कि वे उन लोगों की पैरवी के लिए वकील देंगे, हर तरह से उनका साथ देंगे। इससे यह बात साफ हो जाती है कि मजहब के नाम पर जुनून फैलाने वाले लोग हैं वे कोई और नहीं ऐसी संस्थाएं ही हैं।

 
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पहले देश हैं, फिर धर्म है

फराह फैज का कहना है कि जो शरीयत के नाम पर जो लोगों को गुमराह करते हैं वे बताएं कि ये जो आतंकवादी पकड़े गए हैं, उनके बारे में शरीयत क्या कहती है। मदीना चार्टर में भी यह कहा गया है कि जिस देश में रह रहे हैं वह देश सर्वोपरि है। पहले नंबर पर देश है, उसकी सुरक्षा है, उसके बाद दूसरे नंबर पर धर्म आता है। 

अब काफिर का फतवा देने वाले मदीना चार्टर को पढ़कर यह बताएं कि इस देश की सुरक्षा के खिलाफ काम करने वाले लोगों का पक्ष लेकर क्या वे शरीयत का पालन कर हैं या फिर शरीयत के खिलाफ काम कर रहे हैं। काफिर का फतवा जो वो लोगों को देते हैं, काफिर का फतवा उन पर लागू हो या फिर किसी दूसरे पर।
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