फैज-ए-आम डिग्री कॉलेज के सामने सेना की जमीन पर रातोंरात अवैध कब्जे का प्रयास किया गया। पैठ बाजार लगाने के लिए यहां बल्लियां लगा दी गईं। चूना डालकर जमीन बांटने की तैयारी शुरू हो गई थी। सूचना पर कैंट बोर्ड अफसर और सदर थाना पुलिस पहुंची तो सैकड़ों की भीड़ यहां जमा थी। पुलिस ने उन्हें हटाने की कोशिश की तो लोगों ने विरोध किया। दो घंटे हंगामा चला। बाद में वीडियोग्राफी कराते हुए मशक्कत के बाद जमीन पर हुआ अतिक्रमण हटवाकर लोगों को खदेड़ दिया गया।
जली कोठी पर शुक्रवार को लगने वाला पैठ बाजार पुलिस प्रशासन ने बंद करा दिया था। जिसके बाद से ही पैठ दुकानदार पैठ के लिए जमीन की मांग कर रहे थे। कुछ की नजर फैज-ए-आम डिग्री कॉलेज के सामने खाली पड़ी जमीन पर थी। सोमवार आधी रात के बाद इस जमीन पर लोगों ने बल्लियां गाड़ दी। अपने तख्त, मेज आदि रखकर यहां डेरा जमाना शुरू कर दिया। जमीन पर चूना डालकर निशानदेही कर जमीन बांटी जाने लगी। मंगलवार सुबह कैंट बोर्ड तक यह जानकारी पहुंची तो खलबली मच गई। बोर्ड की सूचना पर सदर थाना पुलिस जब मौके पर पहुंची तो वहां सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा थी।
पुलिस ने भीड़ को कई बार वहां से हटने को कहा। लेकिन लोग जाने को तैयार नहीं थे। लिहाजा वहां जमा लोगों की पुलिसकर्मियों ने अपने मोबाइल से वीडियो बनाने के साथ फोटोग्राफी करनी शुरू कर दी। यह देख लोगों में अफरातफरी मच गई और लोग अपने तख्त, बल्लियां आदि उखाड़कर ले गए। कैंट बोर्ड की टीम भी मौके पर आ गई। करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद दोपहर तक यहां से सभी को हटा दिया गया।
इंस्पेक्टर सदर बाजार पंकज पंत ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ लोग पैठ बाजार के लिए डिफेंस की जमीन पर बल्ली, तख्त डालकर अतिक्रमण की कोशिश कर रहे हैं। पुलिस ने लोगों को वहां से हटवा दिया। कैँट बोर्ड की टीम भी आ गई थी।
50-70 रुपये प्रति मेज तय करने की चर्चा
भीड़ में शामिल लोगों में चर्चा थी कि कुछ लोगों ने इस जमीन पर पैठ बाजार का ठिया लगाने की जिम्मेदारी ली थी। इसके लिए प्रति मेज 50 से 70 रुपये के हिसाब से उनसे लेना तय हुआ था। यह भी अफवाह उड़ाई गई कि इस जमीन पर एक महिला मुकदमा जीत गई है। यह लोग कौन हैं, इस बारे में किसी को नहीं पता था।
गरीबों की झुग्गियां ही बनवा दो
हंगामे के वक्त पास में रहने वाली एक महिला भी मौके पर आ गई। उनका कहना था कि इस जमीन पर गंदगी के ढेर लगे रहते हैं। यदि इस जमीन की सफाई नहीं हो सकती तो गरीबों की झुग्गियां ही यहां बनवा दो। कम से कम गंदगी तो नहीं रहेगी। एक रिक्शा चालक पुलिस से बहस पर उतर गया। पुलिस ने दोनों को समझाबुझाकर भेजा।