स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन में मेरठ का प्रदर्शन सूबे में सबसे फिसड्डी है। हालात यह हैं कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम, जननी और शिशु सुरक्षा योजना से लेकर टीकाकरण व अन्य प्रोग्राम को ही टॉनिक की जरूरत है। यही वजह है कि इन मामलों में मेरठ 75वीं पायदान पर है। शासन से जवाब तलब होने के बाद सीडीओ विशाख जी. ने तीन सीएचसी प्रभारियों के वेतन रोकने के निर्देश दिए हैं। वहीं, डीएम बी. चंद्रकला ने सीएमओ को पत्र लिखकर नाराजगी जताई है।
नवंबर खत्म होने को है, लेकिन मेरठ जिले में नेशनल हेल्थ मिशन के तहत संचालित होने वाले तमाम कार्यक्रमों के लिए वित्तीय वर्ष 2016-17 के बजट का 20 फीसदी ही खर्च हो पाया है। इसके बाद योजनाओं पर खर्च और क्रियान्वयन के मामले में मेरठ प्रदेश में 75वें स्थान यानी सबसे निचली पायदान पर पहुंच गया है। जननी सुरक्षा योजना और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में तो जिले की हालत सबसे पतली है। ऐसे में सीडीओ ने ब्लॉकवार कार्यक्रमों की समीक्षा कर जानी खुर्द, माछरा और भावनपुर सीएचसी प्रभारी का नवंबर माह का वेतन जारी करने पर रोक लगा दी है। उधर, डीएम बी. चंद्रकला ने सीएमओ को पत्र लिखकर जवाब मांगा है। पूछा है कि इतनी बड़ी टीम होने के बाद भी स्वास्थ्य कार्यक्रमों पर काम क्यों नहीं हो रहा है। जिन क्षेत्रों में काम नहीं हो रहा है, उनके नोडल ऑफिसरों पर आपकी तरफ से क्या कार्रवाई की गई है। डीएम ने कहा कि मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाले राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में भी स्थिति चिंताजनक है, जिससे साफ है कि गंभीरता से काम नहीं हो रहा है।
सीएमओ ने भी मांगा जवाब
सीएमओ डॉ. वीपी सिंह ने भी सभी प्रोग्राम अफसर (नोडल अधिकारियों) से जवाब मांगा है। पूछा है कि प्रोग्राम में पिछड़ने की क्या वजह है। काम नहीं हो रहा है तो उसके पीछे कहां पर दिक्कत आ रही है। उधर, कुछ और सीएचसी प्रभारियों पर भी जल्द ही गाज गिर सकती है।