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गुप्त चिट्ठी से खुल गई भाई के कत्ल की साजिश, एक क्लिक में पढ़ें पूरी खबर

Fri, 09 Mar 2018 09:17 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, बागपत
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मौके पर पुलिस - फोटो : अमर उजाला
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यह गुप्त चिट्ठी अगर पुलिस के हाथ नहीं लगती तो किसान नरेश पाल की हत्या राज बनकर ही रह जाती। गुप्त चिट्ठी ने खूनी साजिश और सनसनीखेज वारदात से पर्दा हटा दिया। पढ़िए पूरी खबर...

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बागपत में किसान नरेश पाल की हत्या सिर्फ राज बनकर ही रह जाती। लेकिन पुलिस को मिली एक गुप्त चिट्ठी ने खूनी साजिश और सनसनीखेज वारदात से पर्दा हटा दिया। पुलिस ने पत्र को गंभीरता से लिया और मुखबिरों का जाल बिछाया। आरोपियों की कुंडली खंगाली गई। वारदात के तार जुड़े तो दो आरोपियों को हिरासत में लिया। इसके बाद साजिश खुलती चली गई।

माल माजरा गांव का किसान नरेश पाल दो माह से लापता था। गांव में चर्चा जरूर थी, लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि परिवार के लोग थाने तक नहीं पहुंचे। ग्रामीणों ने समझा दोनों भाईयों के बीच लंबे समय से मनमुटाव है, यही वजह रही होगी। इसी बीच, कुछ दिन पहले ही बिनौली पुलिस को एक चिट्ठी मिली। सादे कागज पर लिखी यह चिट्ठी थाने में खोली गई तो किसी शख्स ने नाम गुप्त रखते हुए किसान के लापता होने से लेकर उसकी हत्या तक के बारे में लिखा था। इसके बाद आरोपियों की सीधे गिरफ्तारी के बजाय पुलिस ने पहले सधी हुई चाल चली। आरोपियों की गतिविधियां और कुंडली खंगाली गई। मुखबिरों ने काम किया। चिट्ठी में लिखी बातों से गांव की चर्चाओं का मेल मिला तो पुलिस हरकत में आ गई। आरोपी भाई समेत दो को हिरासत में लेकर पूछताछ में केस का खुलासा हुआ। फिर दोनों की निशानदेही पर सैकड़ों ग्रामीणों के बीच जमीन खुदवाकर शव बरामद किया गया। 
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माना जा रहा है कि जमीन को लेकर चल रहे विवाद के बीच ही लापता किसान के बारे में परिवार या मोहल्ले के ही किसी शख्स ने गोपनीय चिट्ठी के माध्यम से पुलिस को जानकारी दी है। हालांकि पुलिस की ओर से अभी चिट्ठी से जुड़े शख्स का कोई खुलासा नहीं किया गया है। पुलिस का कहना है कि प्रकरण की जांच अभी जारी है।

क्यों भाई ही बना भाई की जान का दुश्मन?

लाश को गड्ढे से निकलवाती पुलिस - फोटो : अमर उजाला
माल माजरा गांव के किसान रणवीर सिंह के दो बेटे थे। बड़ा रमेश पाल और छोटा नरेश पाल। दोनों के हिस्से में सात-सात बीघा जमीन थी। नरेशपाल की शादी हुई। लेकिन कई साल पहले उसकी पत्नी का निधन हो गया। परिवार में बच्चे नहीं थे। इस वजह से नरेश अकेला पड़ गया। ग्रामीण बताते हैं कि दो साल पहले नरेश ने अपने हिस्से की जमीन बेचने का प्रयास किया था। मगर रमेश पाल ने किसी तरह मामला संभाल लिया। परिवार की पंचायत ने फैसला किया कि नरेश की जमीन को ठेके पर रमेश रखेगा और इसके रुपये उसे मिलते रहेंगे। ऐसा ही किया भी गया। पिछले दिनों नरेश ने अपनी जमीन को खुद बोने की बात कहकर वापस ले लिया। यहीं पर दोनों भाईयों के बीच तकरार बढ़ी और मामला हत्या तक पहुंच गया।

दो लाख रुपये में अंजाम दी गई वारदात
पुलिस के मुताबिक रमेश पाल के खेत में गांव का ही राजीव वाल्मीकि और जिवाना गांव का मनोज और हरबीर गन्ना छिलाई का काम करते थे। पुलिस और ग्रामीणों के मानें तो रमेश पाल ने इन तीनों को हत्या का ठेका दो लाख रुपये में दे दिया। वारदात के दिन नरेश पाल खेत में पहुंचा। गन्ना छिलाई के दौरान वह इन तीनों लोगों के पास पहुंच गया। तीनों ने एकाएक उसे दबोच लिया और गला दबाकर हत्या कर दी। शव को पत्तियों में छिपा दिया गया। फिर तीनों ने मिलकर गड्ढ़ा खोदा और रस्सी के सहारे उसे गड्ढ़े में दबा दिया गया। बाद में रमेश पाल को सूचना दी गई।

पढ़ें : यूपी: सगे भाई का कत्ल कर खेत में दबाई लाश, ये रही हत्या की वजह
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जमीन के सीने पर अपनों के खून के छींटे

मौके पर ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला
जिले में अपनों के खून बहाने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी जमीन के विवाद में कई बार अपनों के कत्ल की साजिश रची गई। मुलसम गांव में खेत में काम करने के दौरान जमीन को लेकर कहासुनी में बेटे ने अपने पिता की हत्या कर दी थी। पुरा गांव में घर और जमीन को लेकर भाभी और उसकी मां की हत्या कर मौत के घाट उतार दिया था। सिंघावली अहीर के चर्चित मास्टर सत्यपाल की हत्या भी जमीनी विवाद के कारण की गई।

बसौद में भी बहन ने ही भाई को मारा
जमीन के लिए ही नहीं बल्कि अन्य वजहों से भी अपने ही अपनों का खून बहाने का काम कर रहे हैं। बसौद गांव में बहन ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर भाई की हत्या कर दी। इससे पहले भी हिसावदा गांव में बहन ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर छह साल के भाई फैजान की हत्या करा दी थी। लाश तालाब से बरामद हुई थी। वजह सिर्फ इतनी थी कि फैजान ने दोनों को देख लिया था और मम्मी को बताने की बात कह दी थी।

हटती रही मिट्टी, फीके पड़ते गए चेहरे
जिस वक्त माल माजरा गांव के जंगल में पुलिस गड्ढ़ा खुदवा रही थी। दोनों आरोपी भी नजदीक ही खड़े थे। गड्ढ़े से मिट्टी हटती रही और दोनों आरोपियों के चेहरे फीके पड़ते गए।

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