वन विभाग की टीमों ने शिकारियों का सुराग पाने के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में छापेमारी की। टीम ने क्षेत्रीय लोगों की मदद से सर्च अभियान चलाया। सेंक्चुरी क्षेत्र में बने फार्म हाउस चेक किए गए। वन्य जीव के अवशेष में ट्रॉफी आदि की खोज की गई।
सिविल लाइन क्षेत्र में रिटायर्ड कर्नल देवेंद्र विश्नोई की कोठी में वन्यजीवों की तस्करी और विदेशी असलहों की बरामदगी के बाद से कई टीमें शूटर प्रशांत की धरपकड़ की कोशिश में लगी हैं। इस सिलसिले में वन विभाग ने शनिवार सुबह सेंक्चुरी क्षेत्र और जंगलों में कई जगहों पर सर्च अभियान चलाया। वाइल्ड लाइफ वार्डन राज सिंह के नेतृत्व में टीम ने तरबियतपुर शुमाली, खानपुरगढ़ी और खरखाली में कलंदरों के निवास स्थलों की तलाशी ली। इसी तरह परीक्षितगढ़ में झब्बापुरी मजरा भगवानपुर और शाहीपुर गांव में अभियान चलाया गया। जानसठ और मोरना में कई ट्यूबवेल चेक की गई। खुर्जा में स्याना के पास एक फार्म हाउस की तलाशी ली गई। मुख्य वन संरक्षक मेरठ जोन मुकेश कुमार का कहना है कि कहीं पर भी कोई आपत्तिजनक चीज नहीं मिली है। लेकिन यह अभियान जारी रहेगा। सेंक्चुरी एरिया में निगरानी बढ़ाई गई है। टाइगर, तेंदुआ, काला हिरन मारने पर सात साल तक की सजा का प्रावधान है। अन्य जीवों को मारने पर तीन साल की सजा का प्रावधान है। वन्य जीवों की ट्रॉफी का रखना या एक जगह से दूसरी जगह ले जाना अपराध है।
प्रशांत को पकड़ने में छूट रहे पसीने
शूटर से शिकारी बने प्रशांत को पकड़ने में पुलिस और जांच एजेंसियों के पसीने छूट रहे हैं। वन विभाग के अलावा यूपी एसटीएफ, डायरेक्ट्रेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलीजेंस और वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल की टीम प्रशांत की तलाश कर रही है। आठ दिन गुजर जाने के बाद भी प्रशांत का कोई अता पता नहीं चला है।