मेरठ। सीसीएसयू प्रशासन ने स्नातक स्तर पर तृतीय वर्ष की परीक्षा में बहुविकल्पीय प्रश्नपत्रों में गलत सवाल पर एक चौथाई अंक काटे जाने के नियम को निरस्त कर दिया है। साथ ही हाईकोर्ट में पैरवी करने वाले अधिवक्ताओं का मानदेय बढ़ाया है। अपर महाधिवक्ता को अब प्रति केस 11 हजार से बढ़ाकर 20 हजार रुपये मानदेय दिया जाएगा। हाईकोर्ट के अन्य वकीलों को 11 हजार से 15 हजार रुपये प्रति केस के दिए जाएंगे। यह निर्णय मंगलवार को कैंपस में हुई कार्य परिषद की बैठक में लिया गया है। 10 छात्र-छात्राओं को शोध उपाधि भी प्रदान की गई है।
मंगलवार शाम कुलपति प्रो. एनके तनेजा की अध्यक्षता में कार्यपरिषद की बैठक कमेटी हॉल में हुई। इसमें 24 दिसंबर को हुई कार्य परिषद की बैठक में रखे गए मामलों का अनुमोदन कर दिया गया। भायला कॉलेज, सहारनपुर में बीए के अतिरिक्त सेक्शन के लिए हिंदी, अंग्रेजी, अर्थशास्त्र, इतिहास, राजनीति विज्ञान, सामाजिक विज्ञान एवं गृह विज्ञान की मान्यता समाप्त की गई। कोर्ट संबंधित मामलों में विश्वविद्यालय द्वारा इलाहाबाद हाईकोर्ट में भेजे जाने वाले कर्मचारियों को भी लखनऊ हाईकोर्ट राज्य जन सूचना आयोग में जाने वाले कर्मचारियों की भांति भत्ता देय होगा। विश्वविद्यालय के क्रीड़ाधिकारी डॉ. गुलाब सिह रूहल की नियुक्ति में अनियमितता की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति से इस संबंध में जल्द से जल्द रिपोर्ट देने को कहा गया है। बैठक में कुलपति प्रो. एनके तनेजा, प्रति कुलपति प्रो. वाई विमला, डॉ. दर्शन लाल अरोड़ा, वित्त अधिकारी सुशील कुमार गुप्ता, कुलसचिव धीरेंद्र कुमार वर्मा, परीक्षा नियंत्रक डॉ. अश्वनी कुमार, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ. राजीव कुमार गुप्ता, प्रो. वीरपाल सिंह, प्रो. आलोक कुमार, प्रो. नवीन चंद्र लोहानी, संकायाध्यक्ष वाणिज्य डॉ. सुधीर कुमार, प्रो. रविंद्र कुमार, डॉ. संजय कुमार, डॉ. ईश्वर सिंह, डॉ. चमन लाल, डॉ. सीमा जैन, डॉ. रेखा तिवारी और मितेंद्र गुप्ता मौजूद रहे।