बहसूमा(मेरठ)। रामराज खादर क्षेत्र में धान की फसल को झुलसा व हल्दी गाठ रोग दिन प्रति दिन बढ़ता ही जा रहा है। जिसके चलते धान की फसल की पत्तियां पीली होकर झुलस रही हैं। किसान दवा का छिड़काव कर रहे हैं लेकिन वह भी काम नहीं कर रही है। जिससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे रही हैं।
बारिश ने कई वर्षों बाद किसानों का पूरा साथ दिया। जिसके परिणाम स्वरूप इस बार धान की फसल अच्छी है। लेकिन धान मेें झुलसा व हल्दी गाठ के प्रकोप ने किसानों की नींद उड़ा दी है। यह रोग पुसा बासमती 1509, पुसा वन, पुसा सरबती बासमती व पुसा 1121 प्रजाति की धान में तबाही मचा रहा है। सैकड़ों बीघा खादर क्षेत्र में धान की फसल की पत्तिया पीली होकर झुलस जा रही हैं। दवा का छिड़काव भी काम नहीं कर रहा है। खादर क्षेत्र के किसानों का कहना है कि सरकारी तंत्र किसानों के लिए कुछ नहीं कर रहा है।
ये बोले किसान-------
किसान विरेंद्र नागर का कहना है कि बारिश हुई तब तक सब कुछ ठीक था। लेकिन जैसे ही बारिश कम हुई पहले धान की पत्तियां पीली हो गई और फिर झुलस गई। दवा का स्प्रे भी किया लेकिन कोई असर नहीं हुआ।
किसान सतबीर भाटी का कहना है कि मेहनत व लागत डूबती नजर आ रही है। कर्ज लेकर धान की फसल की रोपाई की थी। फसल तैयार होती तो धान बेचकर कर्ज चुकाते। लेकिन अरमानों पर पानी फिर रहा है।
किसान अमित बसंल का कहना है कि पहले तो पानी और जल जमाव के कारण धान की फसल बर्बाद हो गई। जो कुछ बची वह रोग के चलते बर्बाद होती दिख रही है। दवा का भी कोई असर नहीं हो रहा है।
वर्जन
कृषि विशेषज्ञ मुकेश सिंह ने बताया कि हल्दी गाठ का प्रकोप यूरिया की बहुतायत, बारिश में हुई नमी के बाद तेज धूप निकलने से फैलता है। 2-3 ग्राम क्लोरोथायोनिल या प्रोपीकोनाजोल 2-3 एमएल दवा, मैटालैजील दवा के साथ मिलाकर स्प्रे करने काफी हद तक इस रोग के प्रकोप को रोका जा सकता है।
वर्जन
हस्तिनापुर स्वामी कल्याण कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डा. ओमबीर सिंह ने बताया कि इस समय धान की फसल में झुलसा रोग का प्रकोप देखने को मिल रहा है। ऐसे में किसान एक एकड़ में 500 ग्राम कापर आक्सीक्लोराईड को 250 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें। इसके अलावा किसान एक एकड में 300 ग्राम एग्री माईसिन 250 लीटर पानी मे मिलाकर छिड़काव कर सकते हैं। इससे फसल को झुलसा रोग से बचाया जा सकता है।