उन्होंने 14 अप्रैल को आंबेडकर जयंती पर गांव के दलितों से किए जा रहे कार्यक्रम के बारे में जानकारी ली। इस पर गांव के दलितों ने बाबा साहब की जयंती मनाने से इंकार कर दिया। हालांकि सीओ ने कार्यक्रम में सहयोग का आश्वासन दिया। लेकिन दलित समाज तैयार नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि दो अप्रैल को जो भी हुआ वह बाहरी लोगों का षड़यंत्र था। दलित उत्पीड़न के प्रतिशोध में यह निर्णय लिया गया है।
सीओ का कहना है कि आंबेडकर जयंती को लेकर गांव में दलित ग्रामीणों की राय ली गई थी। अभी तक गांव के लोगों इस बार जयंती मनाने से इंकार कर रहे हैं। अगर वह किसी कार्यक्रम का आयोजन नियमानुसार करेंगे तो पुलिस प्रशासन उनका सहयोग करेगा।
कैसे मनाएं जयंती गांव में नहीं हैं युवा
कुछ ग्रामीणों ने बताया कि बाबा साहब की जयंती मनाएं भी तो कैसे मनाएं। अधिकतर युवाओं का नाम बवाल में है। सभी के खिलाफ केस दर्ज हैं। पुलिस के डर से सभी भागे हुए हैं। जो बचे हैं, वह भी डरे हुए हैं। कहीं जयंती पर कोई बखेड़ा हो गया तो पता नहीं कितने लोग जेल जाएंगे। दूसरे गांव में दूसरे पक्ष के लोग जयंती के दिन ही गांव में तरह तरह के आयोजन करने की बात कर रहे हैं। इससे साफ जाहिर है कि गांव में फिर कोई विवाद कराना चाहते हैं।
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