मेरठ------मोदीपुरम के एसडीएस ग्लोबल अस्पताल में महिला की मौत के बादएसपी देहात व एसडीएम सरधना मृ
मौत सामने खड़ी थी, शरीर पर घाव गहरे थे और असहनीय दर्द से सांसें उखड़ रही थीं, लेकिन सुनीता की जुबान पर सिर्फ बेटी का ही नाम था। मां की ममता का यह रूप देख वहां मौजूद डॉक्टर भी अपनी आंखों के आंसू नहीं रोक पाए। दर्द से कराहती हुई सुनीता अपना सारा दुख भूलकर बस अपनी अपहृत बेटी की सलामती की दुआ मांगती रही।
एसडीएस अस्पताल में भर्ती सुनीता की हालत गंभीर थी। धारदार हथियारों के हमले से उसका शरीर लहूलुहान था, लेकिन उसे अपने जख्मों की फिक्र नहीं थी। वह बार-बार वहां मौजूद परिजनों और पुलिस अधिकारियों के हाथ जोड़कर बस एक ही विनती कर रही थी, मेरी बेटी को बचा लो साहब... वह अभी बहुत नासमझ है, बच्ची है उसने किसी का क्या बिगाड़ा है... मेरी परवाह छोड़ो, बस मेरी बच्ची को सकुशल मेरे पास ले आओ, उसे देखूंगी तो मैं अपने आप ठीक हो जाऊंगी। उपचार के दौरान जब सुनीता की हालत बिगड़ने लगी और वह धीरे-धीरे अचेत होने लगी, तब भी उसकी जुबान पर अपनी बेटी का ही नाम था। देर शाम जैसे ही सुनीता की सांसों ने साथ छोड़ा, वैसे ही अस्पताल परिसर चीख-पुकार से गूंज उठा। इस खबर के बाद परिजनों और ग्रामीणों का आक्रोश सातवें आसमान पर पहुंच गया। संवाद