सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा कागजों में सिमटकर रह गयी है। करीब आठ साल पहले लगे कंप्यूटर धूल फांक रहे हैं। एक भी स्कूल ऐसा नहीं, जहां कंप्यूटर शिक्षा दी जा रही हो। यह हाल बेसिक शिक्षा परिषद के पूर्व माध्यमिक स्कूलों का है। जहां प्रत्येक ब्लॉक के पांच से छह स्कूलों का चयन कर प्रत्येक स्कूल में मय फर्नीचर तीन-तीन कंप्यूटर, यूपीएस और एक प्रिंटर दिया गया था। कंप्यूटर शिक्षा के लिए मानदेय पर प्रशिक्षक रखने की बात कहने वाले अधिकारी कई साल तक प्रशिक्षक ही उपलब्ध नहीं करा पाए।
गजब का गेम हुआ
करीब तीन साल पहले कंप्यूटर शिक्षा, कला और व्यायाम के लिए मानदेय पर शिक्षकों की नियुक्ति में गजब का गेम हुआ। जहां कंप्यूटर थे, वहां कंप्यूटर शिक्षक नियुक्त नहीं हुआ और जहां कंप्यूटर नहीं थे, वहां पर शिक्षक भेज दिया गया। जहां दोनों थे वहां कंप्यूटर ही गायब हो चुके थे। ऐसे में एक भी स्कूल में कंप्यूटर शिक्षा आज तक शुरू नहीं हो पायी।
यह हुआ कंप्यूटर शिक्षा का हाल
- इन कंप्यूटरों की वर्तमान स्थिति को लेकर किसी के पास कोई जानकारी नही है
- कई स्कूलों में कंप्यूटर खराब हो चुके हैं तो अधिकांश स्कूलों में कंप्यूटर ही नहीं है
- कहीं शिक्षक तो कहीं ग्राम प्रधान कंप्यूटरों को घर ले गये
- जहां कंप्यूटर और शिक्षक दोनों हैं, वहां कई स्कूलों की बिजली कटी है
- जहां कनेक्शन चालू हैं तो स्कूल के समय बिजली नहीं आती
- कंप्यूटर अनुदेशकों की नियुक्ति का टेंडर ही भ्रष्टाचार में फंसकर निरस्त हो गया
- जीआईसी मेरठ में कंप्यूटर लैब शोपीस बन चुका है