मेरठ से चंद किलोमीटर की दूरी पर स्थित ऐतिहासिक रोमन कैथलिक चर्च सौहार्द, आस्था और इतिहास का बेजोड़ नमूना है। इस चर्च को बेगम समरू द्वारा बनवाया गया था। इस चर्च को ईसाई धर्म के लोग कृपाओं की माता मरियम का तीर्थस्थान मानते हैं।
विज्ञापन
2 of 8
sardhana Church Meerut
- फोटो : अमर उजाला
ऐसी मान्यता है कि माता मरियम अपने श्रद्धालुओं पर कृपा बरसाती हैं। मां मरियम के दर्शन करने के लिए यहां देश-विदेशों से पर्यटक आते हैं। इस ऐतिहासिक चर्च के कारण ही सरधना का नाम अंतरराष्ट्रीय फलक पर चमकता है।
विज्ञापन
3 of 8
sardhana Church Meerut
- फोटो : अमर उजाला
ये है चर्च का इतिहास
बेगम समरू के द्वारा बनवाए गए इस चर्च को पोप जॉन 23वें ने 1961 में माइनर बसिलिका का दर्जा दिया था। बताना जरूरी होगा कि ऐतिहासिक और भव्य गिरिजाघरों को ही यह दर्जा प्राप्त होता है।
4 of 8
sardhana Church Meerut
- फोटो : अमर उजाला
बड़ी बात यह है कि इस चर्च को बनने में करीब 11 वर्ष का समय लगा था। चर्च के निर्माण में कई सौ कलाकार लगे थे और इसका निर्माण का कार्य वर्ष 1809 में शुरू हुआ था। इस ऐतिहासिक चर्च के खास दरवाजे पर इमारत के बनने का वर्ष 1822 दशार्या गया है।
विज्ञापन
5 of 8
sardhana Church Meerut
- फोटो : अमर उजाला
चर्च की खास बात हैं यहां मौजूद माता मरियम की चमत्कारिक तस्वीर। बताया जाता है कि इस तस्वीर के सामने सच्चे दिल से प्रार्थना करने पर हर मुराद पूरी होती है। बताते हैं कि इस चमत्कारिक तस्वीर को इंग्लैंड से लाया गया था।
विज्ञापन
6 of 8
sardhana Church Meerut
- फोटो : अमर उजाला
मान्यता है कि तस्वीर को जिस दिन चर्च में स्थापित किया गया उसी एक महिला ने यहां अपने बीमार बच्चे के साथ प्रार्थना की। इसके बाद महिला को बच्चा पूरी तरह स्वस्थ हो गया तभी से यहां यह चमत्कारिक तस्वीर श्रद्धालुओं पर कृपा बरसाती हैं।
विज्ञापन
7 of 8
sardhana Church Meerut
- फोटो : अमर उजाला
हालांकि चर्च में वर्ष भर पर्यटकों का आना जाना लगा रहता है लेकिन इस तीर्थस्थान की खूबसूरती देखने के लिए नवंबर से जनवरी माह के बीच का समय सबसे बेहतर है। इस दौरान चर्च की खूबसूरती देखते ही बनती है।
चर्च में हर साल नवंबर माह के दूसरे शनिवार और रविवार को मेले का आयोजन होता है और विशेष प्रार्थनाएं आयोजित की जाती हैं। इसी तरह 25 दिसंबर और ईस्टर के दिन भी को भी लोग मां मरियम के दर्शन करने आते हैं।