मेरठ। माघ शुक्ल की पंचमी (रविवार) को महासिद्धि योग में वसंत पंचमी पर्व मनाया जाएगा। इस दिन विद्या की देवी मां सरस्वती की विशेष पूजा होगी। रविवार को उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र के दौरान यह बन रहा है। इस योग में पूजा-अर्चना से मां सरस्वती की कृपा बरसेगी।
इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस के सचिव आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि सुबह 9:30 से 12:35 तक पूजा करने से परीक्षा में सफलता के संयोग बनेंगे। सरस्वती पूजन के साथ यह दिन कई खास कार्यों के लिए भी बेहद शुभ माना जाता है।
ज्योतिषाचार्य विनोद त्यागी ने बताया कि इस योग में ध्यान और पूजा का विशेष महत्व है। इस वर्ष प्रयागराज में महाकुंभ में अमृत स्नान भी होगा। ज्योतिष के अनुसार ऐसे में इस वर्ष 144 साल बाद ऐसा शुभ योग बन रहा है, जो इस दिन को और भी खास बना रहा है। बसंत पंचमी के दिन शनि नक्षत्र परिवर्तन कर रहे हैं। इसके अलावा सूर्य, शुक्र और वरुण भी शुभ राजयोग बना रहे हैं।
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इस मंत्र के जाप से तेज होगी बच्चों की बुद्धि
- जो पढ़ने में कमजोर हैं या जिनका पढ़ाई में मन नहीं लगता है, उन्हें मां सरस्वती के मूलमंत्र का जाप करना चाहिए। यह मूल मंत्र है- श्रीं हीं सरस्वत्यै नमः। इस मंत्र के जाप से बुद्धि और विवेक में वृद्धि होती है। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार सृष्टिकाल में ईश्वर की इच्छा से आद्याशक्ति ने स्वयं को पांच भागों में विभक्त किया। वे राधा, पद्मा, सावित्री, दुर्गा एवं सरस्वती के रूप में भगवान श्रीकृष्ण के विभिन्न अंगों से उत्पन्न हुईं। सर्वप्रथम भगवान श्रीकृष्ण ने सरस्वती की पूजा की है।
स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए ऐसा करें
- स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए 11 तुलसी के पत्तों का रस मिश्री के साथ लें। पीले वस्त्र धारण करें। पीले चावल, लड्डू, केसर युक्त खीर का भोग लगाएं। बच्चा जिस ओर मुंह करके पढ़ता है, उस दीवार पर आज के दिन मां सरस्वती का चित्र लगाएं। पढ़ाई में रुचि जागृत होगी। कोशिश करें कि पढ़ते समय बच्चे का मुंह उत्तर पूर्व में रहे। सोते समय बच्चों को सिर पूर्व की ओर रखना चाहिए। इससे स्मरण शक्ति बढ़ती है। एक क्रिस्टल बॉल अथवा क्रिस्टल का श्रीयंत्र लाकर अध्ययन कक्ष में रखें।
- वासनाओं के अंत का पर्व है वसंत पंचमी
- वसंत यानी वासनाओं का अंत और पंचमी यानी पंच तत्त्वों से बनी काया। पंच तत्त्वों से बनी काया से वासनाओं का मिट जाना ही वसंत पंचमी है। वसंत पंचमी के दिन हम सरस्वती (स, रस, वती) की वंदना करते है। स मतलब परमात्मा, उस परमात्मा के रस में इंद्रियां डूब जाए। वासनाओं के अंत के बाद ही भक्ति रस से सरोबार हुआ जा सकता है। बिना इसके आत्मकल्याण या ईश प्राप्ति असंभव है।
अबूझ मुहूर्त में होंगे विवाह समारोह
- वसंत पंचमी के दिन अबूझ मुहूर्त भी होता है। इस दिन विवाह समारोह सहित अन्य मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं। ऐसे में शहर 400 से अधिक विवाह समारोह होंगे। यह दिन अन्नप्राशन के लिए भी अत्यंत शुभ माना जाता है। गृह प्रवेश से लेकर नए कार्यों की शुरूआत तक के लिए भी इस दिन को अत्यंत शुभ माना गया है।