राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा जैन धर्म की संथारा प्रथा पर रोक लगाने के विरोध में जैन समाज ने कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर विरोध जताया। वहीं एकजुटता का परिचय देते हुए जैन समाज के लोगों ने अपने प्रतिष्ठान और स्कूल बंद रखे। इसके अलावा राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा।
सकल जैन समाज मेरठ महानगर के बैनर तले जैन समाज के लोग सोमवार को एकत्र होकर कलक्ट्रेट पहुंचे। वहां नारेबाजी कर और सभा की। इसमें जैन समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेश जैन रितुराज ने कहा कि सल्लेखना या संथारा आत्महत्या नहीं बल्कि अंत समय तक धर्म साधना करना है।
संथारा के मूल सिद्धांत, प्रक्रिया और उद्देश्य को समझे बिना राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा हाल ही में पारित निर्णय पूरे जैन समाज की धर्म साधना पर गंभीर आघात है। जैन धर्म अनादि समय से स्थापित वैज्ञानिक धर्म है। जैन धर्म में सूक्ष्म जीव व प्रकृति पर भी किसी प्रकार की हिंसा की भावना का कोई स्थान नहीं है।
इसके साथ ही जैन धर्मावलंबी आजीवन अनुशासित जीवन जीते हैं। मृत्यु की कल्पना से विचलित होने के स्थान पर अंतिम सांस तक धर्म साधना करना किसी भी कानून में निषिद्ध नहीं है। ऐसी धर्म साधना को आत्महत्या या कुप्रथा के नाम पर प्रतिबंधित करने का आदेश जैन धर्मावलंबियों के मूल अधिकारों का हनन है।
इसे आत्महत्या या इच्छा मृत्यु की संज्ञा नहीं दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि जैन साधक जीवन पर्यन्त जिस सिद्धांत पर अमल करता है। उस धार्मिक क्रिया का पालन करने से उसे जीवन के अंत समय में वंचित नहीं किया जा सकता है। इसलिए इस प्रतिबंध को किसी भी दशा में स्वीकार नहीं किया जा सकता है।
इस दौरान नगीन चंद जैन, अरिहंत जैन, सुनील जैन, दिनेश जैन, विपिन जैन, रणजीत जैन, सुरेंद्र जैन, संजय जैन, राकेश जैन, वीरसैन जैन, प्रवीण जैन, वीनेश जैन, अरुण जैन, अंकुर जैन, अनिल जैन, अंकित जैन, संजीव जैन, राकेश कुमार जैन, अक्षय जैन अरिहंत, प्रवीन कुमार जैन, संजीव कुमार जैन, वीरेंद्र कुमार जैन, श्रेयांश जैन, मृदुल जैन, पदम प्रकाश जैन, सुनील जैन सर्राफ, राजकुमार जैन सर्राफ आदि मौजूद रहे।
बंद रखे प्रतिष्ठान और स्कूल
संथारा पर प्रतिबंध के विरोध में जैन समाज ने एकजुटता का परिचय दिया। कलक्ट्रेट पर धरना प्रदर्शन और विरोध के लिए जैन समाज के लोगों ने अपने प्रतिष्ठान बंद रखे। इस दौरान शहर में जैन समाज के लोगों के पेट्रोल पंप, दुकानें, गैस एजेंसी आदि तमाम प्रतिष्ठान दोपहर तक बंद रहे। वहीं जैन समाज के जितने भी स्कूल शहर में है, सभी ने उन्हें बंद रखा। जिस कारण कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन में महिलाएं और बच्चे भी बड़ी संख्या में शामिल रहे।