मेरठ। मंदिर, चर्च और पीर इन तीनों पवित्र स्थलों से शोभायात्रा निकली तो हर कोई भाव-विभोर हो गया। बैंडबाजे की धुन और संस्कृत के श्लोकों की गूंज हर किसी को भक्ति के भाव में डुबो गई। ये नजारा था मंगलवार को संस्कृत विभाग की तरफ से शुरू हुए सात दिवसीय व्यास समारोह में निकाली गई शोभायात्रा का।
समारोह की शुरुआत मंगलवार सुबह औघड़नाथ मंदिर, सेंट जोजफ चर्च और छतरी वाले पीर से शुरू हुई। बैंडबाजे के साथ निकली शोभायात्रा पीएल प्यारेलाल शर्मा स्मारक पहुंची। यात्रा में संस्कृत के श्लोक गूंजते रहे। यात्रा के सूरजकुंड पहुंचने पर यहां हवनकुंड की मिट्टी को कलश में रखा गया। डॉ. संतोष कुमार ने छात्रों को बताया कि यह भीम और दुर्योधन की भूूमि है। जिसकी मिट्टी विजय का प्रतीक है। इसके बाद यात्रा बाबा मनोहरनाथ मंदिर पहुंची। यहां पर माता नीलिमानंद ने सभी का स्वागत कर प्रसाद वितरित किया। इसके बाद यात्रा कैंपस पहुंची। जहां कुलपति प्रो. एनके तनेजा और डॉ. योगेंद्र सिंह के साथ छात्रों और विद्वानों ने यात्रा का भव्य स्वागत किया। कैंपस में परिक्रमा करते हुए संस्कृत विभाग में चल रहे यज्ञ में सभी ने आहुति दी एवं पवित्र कलश को भगवान गणेश की मूर्ति के समक्ष स्थापित किया। रथ में सवार व्यास का मनोहर रूप सभी के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। व्यास के रूप में ऋषभ तिवारी रहे। पुरी उड़ीसा से आए प्रो. विश्वनाथ स्वाई और डॉ. द्वारिकानाथ त्रिपाठी एवं डायट मेरठ के सत्यपाल शर्मा, डॉ. वाचस्पति मिश्रा, डॉ. पूनम लखनपाल, डॉ. नरेंद्र कुमार, डॉ. संतोष कुमारी, डॉ. राजवीर, डॉ. ओमपाल शास्त्री, डॉ. अंजलि त्यागी, शिखा त्यागी, सविता, डेजी, विनीता, नविता, संध्या, आयुषी, प्रीति, भारती, शिवानी, अनिका, पारूल, वैशाली, राहुल, पवन, रजनीश, प्रदीप, दीपक, अमर, अंकुर, शुभम, देवदत्त, जुगनी और विपिन मौजूद रहे।
कार्यक्रम का इतिहास बताया
व्यास समारोह की संयोजक डॉ. पूनम लखनपाल ने अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह समारोह कालीचरण पौराणिक द्वारा दी गई एक लाख रुपये की धनराशि से शुरू किया गया। आज यह विवि के सहयोग से कराया जाता है। इस मौके पर महर्षि व्यास कुलपति प्रो. एनके तनेजा, प्रति कुलपति प्रो. वाई विमला, प्रणेता डॉ. सुधाकर त्रिपाठी, मुख्य अतिथि सांसद राजेंद्र अग्रवाल और विशिष्ट अतिथि विश्वनाथ स्वाईं एवं विवि के शिक्षकों ने दीप प्रज्ज्वलन किया। डॉ. सुधाकरचार्य त्रिपाठी ने व्यास समारोह की निर्विघभन समाप्ति के लिए मंगल कामना की। सांसद डॉ. राजेंद्र अग्रवाल ने संस्कृत श्लोक पढ़ा। उन्होंने कहा कि संस्कृत संस्कार, ज्ञान, विज्ञान की भाषा है। इसकी लिपि देवनागरी के समान कोई लिपि वैज्ञानिक नहीं है। कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने संस्कृत में वक्तव्य देकर सभी को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने कहा कि संस्कृत संस्कार की भाषा है, जिन्हें हम कर्मकांड कहतेे हैं, वह संस्कारित करने का कार्य करते हैं।
संगीत ने बांधा समा
शाम के सत्र में दौलतराम कॉलेज में संगीत गायन की प्रोफेसर डॉ. दीप्ति बंसल और डॉ. स्वाति शर्मा ने गायन की शानदार प्रस्तुति दी। गायन में उनका साथ डॉ. दीप्ति की बेटी मनस्विनी लखनपल ने दिया। कार्यक्रम में गणेश स्तुति, सरस्वती स्तुति, नारद स्तुति और भैरव राग रही। प्रस्तुति देखकर श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। आरजी कॉलेज की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. स्वाति शर्मा ने संस्कृत में शिवस्तुति, मधुराष्टक की मनमोहक प्रस्तुति दी। तबले पर हेमंत शुक्ला ने उपयुक्त संगति कर प्रस्तुति को ओर प्रभावशाली बना दिया।
आज होंगे ये कार्यक्रम
व्यास समारोह के दूसरे दिन 10 बजे महाविद्यालय संस्कृत वाद विवाद प्रतियोगिता होगी। दोपहर दो बजे शोध संगोष्ठी एवं शाम चार बजे यौगिक बल प्रदर्शन होगा। साढ़े पांच बजे काव्य पाठ होगा।