दलित युवक पक्ष के शाहदरा निवासी युवक ने मानवाधिकार आयोग को भेजे शिकायत पत्र में बताया था कि युवती को बरामद करने के लिए तत्कालीन दारोगा अमन सिंह, पुलिस वाले और तीन अन्य लोगों के साथ मिलकर उसे घर से लेकर गए। उसे अवैध रूप से हवालात में रखा गया। इस मामले में दरोगा के अलावा मनोज, सुधीर, विकास व दो-तीन पुलिस वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। दरोगा अमन सिंह अब रिटायर हो चुके हैं।
डोडा पोस्त का मुकदमा दर्ज किया तो फंसी पुलिस
दलित युवक पर एनडीपीएस का मुकदमा दर्ज कर पुलिस अपने ही घेरे में फंसती दिख रही है। अब तक की जांच में पुलिस अफसरों ने भी तत्कालीन दरोगा अमन सिंह को जिम्मेदार मान लिया है।
इस तरह सख्त हुआ सुप्रीम कोर्ट
पिछले दिनों ही सुप्रीम कोर्ट ने झूठा केस बनाने और दलित युवक के परिवार को परेशान करने के कारण उत्तर प्रदेश सरकार को पांच लाख रुपये पीड़ित परिवार को देने के आदेश दिए थे। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती से पुलिस अधिकारी हरकत में आए और एफआर दाखिल की गई। मुकदमों से संबंधित दस्तावेज पूरे किए जा रहे हैं।
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सुप्रीम कोर्ट में दलित पक्ष की युवती की ओर से याचिका दाखिल होते ही यह प्रकरण विदेशों तक गूंजा। नीदरलैंड, इंग्लैंड, अमेरिका, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, यूएसए, फ्रांस, स्विटजरलैंड तक गूंज रही और सामाजिक संगठनों ने भी खाप पंचायत की निंदा की। लेकिन सांकरौद के ग्रामीणों का कहना था कि यह मामला सिर्फ दो पक्षों का है। गांव में कोई पंचायत नहीं हुई। सांकरौद के ग्रामीणों ने पंचायत होने और फैसला सुनाए जाने को झूठा बताया था। ग्रामीणों ने कहा कि दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं और खाप पंचायत का नाम बेवजह खसीटा जा रहा है।
यह दर्ज हुए थे तीन मामले
- युवती से रेप, जिसमें पुलिस ने एफआर लगा दी है।
- डोडा पोस्त में जेल भेजने पर पुलिस पर दर्ज मुकदमा।
- दलित युवक को अवैध हिरासत में रखा, जांच चल रही है।
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