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सांकरौद प्रकरण: युवती बोली- नहीं हुआ दुष्कर्म, 3 साल बाद लगी एफआर

Sun, 15 Apr 2018 07:44 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, बागपत
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फाइल फोटो
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बागपत में सांकरौद गांव के बहुचर्चित प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद पुलिस हरकत में आ गई है। दलित युवकों पर लगाए गए रेप के मामले में पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगा दी है। दुष्कर्म के मामले की जांच कर रही महिला थानाध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने न्यायालय में फाइनल रिपोर्ट दाखिल कर दी है। एसपी जयप्रकाश ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि दुष्कर्म के मामले में कोर्ट में एफआर दाखिल कर दी गई है। युवती ने कुछ दिन पहले दिए बयान में खुद कहा था कि उसके साथ दुष्कर्म नहीं हुआ है। अन्य दो मामलों की जांच चल रही है।  

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सांकरौद गांव की युवती ने तीन साल पूर्व खेकड़ा थाने में तहरीर देकर आरोप लगाया था कि गांव का ही दलित युवक उसे नौकरी लगवाने का झांसा देकर दिल्ली ले गया। दिल्ली में आरोपी ने अपने भाई दिल्ली पुलिस के सिपाही के साथ मिलकर उसके साथ दुष्कर्म किया। कमरे में बंधक बनाकर रखा गया, लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की। 10 अप्रैल 2015 को सीजेएम कोर्ट बागपत के आदेश पर युवक रवि, उसके भाई सुमित (दिल्ली पुलिस के सिपाही), पिता धर्मपाल समेत पांच के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। खेकड़ा थाने के तत्कालीन दरोगा अमन सिंह ने युवती को बरामद कर परिजनों को सौंप दिया था। आरोपी युवक पर डोडा बरामद करने का दावा करते हुए मुकदमा दर्ज किया था। आरोपी दलित समुदाय के थे, जबकि युवती जाट समुदाय की थी। प्रकरण को लेकर पूरे क्षेत्र में तनाव के हालात बन गए थे। प्रकरण की जांच महिला थानाध्यक्ष प्रतिभा सिंह कर रही थी। 
 
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गूंजा था मामला
आरोपी बनाए गए दलित युवक की बहन की ओर से 2015 में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका से यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां में आया। याचिका में कहा गया था कि उसके भाई का गांव में रहने वाली दूसरी बिरादरी की युवती से प्रेम प्रसंग चल रहा था। दोनों घर से चले गए थे। पुलिस ने युवती को बरामद कर उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया था और उसके भाई को फर्जी तरीके से डोडा बरामद कर जेल भेज दिया था। आरोप था कि युवती के परिजनों ने गांव में ही खाप पंचायत की। फरमान सुनाया गया था कि उसे व उसकी बहन के साथ दुष्कर्म करने के बाद मुंह काला कर गांव में घुमाया जाए। यह याचिका दाखिल होते ही यह मामला मीडिया की सुर्खियों में छा गया था।
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मानवाधिकार आयोग तक पहुंचा प्रकरण 

फाइल फोटो
दलित युवक पक्ष के शाहदरा निवासी युवक ने मानवाधिकार आयोग को भेजे शिकायत पत्र में बताया था कि युवती को बरामद करने के लिए तत्कालीन दारोगा अमन सिंह, पुलिस वाले और तीन अन्य लोगों के साथ मिलकर उसे घर से लेकर गए। उसे अवैध रूप से हवालात में रखा गया। इस मामले में दरोगा के अलावा मनोज, सुधीर, विकास व दो-तीन पुलिस वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। दरोगा अमन सिंह अब रिटायर हो चुके हैं।  
 
डोडा पोस्त का मुकदमा दर्ज किया तो फंसी पुलिस 
दलित युवक पर एनडीपीएस का मुकदमा दर्ज कर पुलिस अपने ही घेरे में फंसती दिख रही है। अब तक की जांच में पुलिस अफसरों ने भी तत्कालीन दरोगा अमन सिंह को जिम्मेदार मान लिया है।  
 
इस तरह सख्त हुआ सुप्रीम कोर्ट 
पिछले दिनों ही सुप्रीम कोर्ट ने झूठा केस बनाने और दलित युवक के परिवार को परेशान करने के कारण उत्तर प्रदेश सरकार को पांच लाख रुपये पीड़ित परिवार को देने के आदेश दिए थे। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती से पुलिस अधिकारी हरकत में आए और एफआर दाखिल की गई। मुकदमों से संबंधित दस्तावेज पूरे किए जा रहे हैं।

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खाप पंचायत नहीं हुई, विदेशों तक गूंजा मामला 

फाइल फोटो
सुप्रीम कोर्ट में दलित पक्ष की युवती की ओर से याचिका दाखिल होते ही यह प्रकरण विदेशों तक गूंजा। नीदरलैंड, इंग्लैंड, अमेरिका, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, यूएसए, फ्रांस, स्विटजरलैंड तक गूंज रही और सामाजिक संगठनों ने भी खाप पंचायत की निंदा की। लेकिन सांकरौद के ग्रामीणों का कहना था कि यह मामला सिर्फ दो पक्षों का है। गांव में कोई पंचायत नहीं हुई। सांकरौद के ग्रामीणों ने पंचायत होने और फैसला सुनाए जाने को झूठा बताया था। ग्रामीणों ने कहा कि दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं और खाप पंचायत का नाम बेवजह खसीटा जा रहा है। 
 
यह दर्ज हुए थे तीन मामले 
- युवती से रेप, जिसमें पुलिस ने एफआर लगा दी है। 
- डोडा पोस्त में जेल भेजने पर पुलिस पर दर्ज मुकदमा। 
- दलित युवक को अवैध हिरासत में रखा, जांच चल रही है।

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