संजीव जीवा का अंतिम संस्कार
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इससे पहले मई में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या पांच/गैंगस्टर कोर्ट से जिला कारागार लखनऊ को जीवा की पेशी के लिए पत्र लिखा गया था। इस कोर्ट में उस पर तीन मुकदमे चल रहे थे।
जेलर ने जवाब दिया था कि एससीएसटी के मुकदमे में पेशी के चलते मुजफ्फरनगर में जीवा को पेश किया जाना संभव नहीं हो रहा है। इसके बाद सुनवाई के लिए सात जून यानी बुधवार की तिथि तय की गई। इस बार भी जीवा को मुजफ्फरनगर के बजाय लखनऊ की एससीएसटी कोर्ट में पेश किया गया। इसी दौरान उसकी हत्या कर दी गई।
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कठघरे की तरफ जैसे बढ़ा जीवा हमलावर बरसाने लगा गोलियां
कुख्यात संजीव माहेश्वरी जीवा पर गोलियां दागने के लिए हमलावर घात लगाए बैठा रहा। वह वकील के लिबास में था, इसलिए उस पर किसी तरह का शक नहीं हुआ। जैसे ही अपने केस की बारी आते ही जीवा कोर्ट रूम के कठघरे की तरफ चला आरोपी विजय यादव ने उसपर ताबड़तोड़ गोलियां दागनी शुरू कर दीं।
पलक झपकते ही जीवा ढेर हो गया। गोलियां रिवॉल्वर से दागी गईं। पुलिस ने छह खोखे बरामद किए है। यानी पूरी रिवाॅल्वर खाली कर दी। सूत्रों के मुताबिक संजीव के पहुंचने से काफी पहले ही विजय कोर्ट परिसर में पहुंच गया था। काली कोट, हाथों में फाइलें लिए एससी-एसटी कोर्ट रूम के बाहर वह बैठ गया।
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पुलिस ने तीन वर्ष पूर्व रुकवा दिया था मकान का निर्माण
संजीव जीवा के पुश्तैनी मकान खाली पड़ा है, जबकि एक अन्य मकान का निर्माण गांव के मुख्य मार्ग पर कराया जा रहा था। करीब तीन साल पहले पुलिस ने गांव में पहुंचकर मकान का निर्माण रुकवा दिया था। तब से मकान का निर्माण अधूरा पड़ा है।