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जिले की छह सीटों पर भाजपा के प्रत्याशी घोषित, रविंद्र भड़ाना को झटका

Tue, 17 Jan 2017 04:39 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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काफी मंथन के बाद सोमवार को भाजपा ने अपने पत्ते खोले तो चुनावी रण में कई सूरमा फिर से खड़े नजर आए हैं। सरधना सीट से संगीत सोम तो डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी को शहर सीट से फिर से प्रत्याशी घोषित किया गया है। सिटिंग एमएलए होने के बावजूद दक्षिण से रविन्द्र भड़ाना अपना टिकट नहीं बचा पाए। उनके स्थान पर सोमेंद्र तोमर को प्रत्याशी घोषित किया गया। जबकि किठौर से सत्यवीर त्यागी, हस्तिनापुर से दिनेश खटीक और सिवालखास से जितेंद्र सतवाई को उम्मीदवार घोषित किया गया है।
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नहीं मिला कोई दावेदार
मेरठ शहर सीट पर डॉ. वाजपेयी लगातार सातवीं बार चुनाव लड़ेंगे। प्रदेश अध्यक्ष रह चुके डॉ. वाजपेयी चार बार विधायक निर्वाचित हो चुके हैं और इस बार भी उनके सामने किसी की दावेदारी टिक नहीं पाई। वहीं, सरधना सीट पर भी विधायक ठा. संगीत सोम के सामने कोई दावेदार इस बार पार्टी में सामने नहीं आया था।

संघ की पैरवी पर सोमेंद्र को टिकट
मेरठ दक्षिण सीट पर 2012 में ऐन वक्त पर डॉ. सोमेंद्र तोमर का टिकट काटकर रविंद्र भड़ाना को दिया गया था। वह चुनाव जीत गए थे। बावजूद इसके इस बार वह टिकट बचाने में कामयाब नहीं हो पाए। लेकिन, इस बार सोमेंद्र टिकट पाने में कामयाब रहे। माना जा रहा है कि इन पांच वर्षों में भड़ाना पार्टी के स्थानीय नेतृत्व को नहीं साध पाए। वहीं सोमेंद्र का टिकट तय होने के पीछे सांसद राजेंद्र अग्रवाल और संघ की मजबूत पैरवी भी माना जा रहा है।
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हस्तिनापुर और सिवाल में नये चेहरे
हस्तिनापुर सुरक्षित सीट पर भाजपा ने दिनेश खटीक को मौका दिया है। दिनेश संघ की पृष्ठभूमि से जुड़े होने के साथ ही भाजपा संगठन में पिछले दस वर्षों से पदाधिकारी रहते आए हैं। हालांकि यहां पूर्व विधायक गोपाल काली भी मजबूती से दावेदारी पेश कर रहे थे। लेकिन टिकट नहीं ले पाए।

सतवाई को मिला स्थानीय होने का लाभ
सिवालखास सीट का व्यूह भेदना भाजपा के लिए अबूझ पहेली रहा है। यहां इस बार सबसे ज्यादा दावेदार थे। जहां गैर जाट और जाट के बीच प्रत्याशी चयन की बात उठ रही थी। लेकिन जाट बहुल विधानसभा में भाजपा ने जाट कार्ड खेला। प्रधानाचार्य जितेंद्र सिंह सतवाई को स्थानीय होने के साथ ही सांसद सत्यपाल सिंह के करीबी होने का लाभ मिला। यहां से जिपं सदस्य डॉ. मीनाक्षी भराला और पूर्व जिपं अध्यक्ष मनिंदरपाल सिंह को तगड़ा झटका लगा। दोनों ही अपनी दावेदारी मजबूती से पेश कर रहे थे। इसके अलावा पं. सुनील भराला को भी मायूसी हाथ लगी। डॉ. मीनाक्षी भराला के टिकट कटने के पीछे जहां जिला पंचायत चुनाव में क्रास वोट के आरोप का कारण माना जा रहा है, तो मनिंदरपाल सिंह का टिकट कटने के पीछे उनका लगातार दल बदलना और जिला पंचायत चुनाव में स्वयं और पत्नि का चुनाव हारना माना जा रहा है।

किठौर से खेला त्यागी कार्ड
किठौर सीट से गुर्जर और त्यागी बिरादरी के दावेदार सामने थे। इनमें रालोद छोड़कर भाजपा में शामिल हुए सत्यवीर त्यागी पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष अश्वनी त्यागी पर भारी पड़े। सत्यवीर त्यागी 2012 में किठौर से रालोद से चुनाव लड़े थे और करीब तीस हजार से ज्यादा वोट पाकर तीसरे नंबर पर रहे थे।

कैंट पर सस्पेंस
कैंट सीट को लेकर सबसे ज्यादा घमासान मचा है। यहां संघ और भाजपा के बीच पाले खींचे हैं। वर्तमान विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल जहां 75 साल की आयु पार करने के कारण टिकट बचाने को जोर लगा रहे हैं, तो दावेदारी में पूर्व विधायक अमित अग्रवाल, मुकेश सिंघल, संजीव जैन सिक्का, जयकरण गुप्ता, पवन मित्तल, अजय गुप्ता, विनीत शारदा, हरिकांत अहलूवालिया, राजीव दीवान आदि हैं। इनमें कई की पैरवी जहां संघ के अलग-अलग नेता कर रहे हैं, तो कुछ की पैरवी में भाजपा के वरिष्ठ नेता लगे हैं। इसके अलावा ग्राउंड रिपोर्ट भी कुछ दावेदारों को आगे ले जा रही है। इसी खींचतान में कैंट का टिकट फिलहाल रोका जाना बताया जा रहा है।
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