एक दिन सप्लाई के बाद गंगाजल रोक दिया गया। पानी की गंदगी और बढ़ते विवाद को देखते हुए जल निगम और प्रतिभा कंपनी के अधिकारियों ने कदम पीछे खींच लिए। अधिकारियों ने जल्दबाजी के लिए जनता से माफी मांगी है। महापौर ने एक सप्ताह तक पाइप लाइन की सफाई और पानी की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। पूरी जांच पड़ताल और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में पानी की सप्लाई की जाएगी।
जेएनएनयूआरएम गंगाजल योजना पर जल निगम और प्रतिभा कंपनी के अधिकारी खेल करने पर तुले हैं। सबसे पहले तीन साल तक सड़कें खोदकर शहर को परेशान किया, वहीं अब गंदा पानी पाइप लाइन में छोड़ दिया। लोगों के घरों तक मिट्टी और रेत पहुंच गया। टंकियों और आरओ में रेत जम गया। इससे लोग परेशान हो गए। लोगों ने इसका विरोध किया तो गंगाजल एक सप्ताह के लिए रोक दिया गया।
निगम अधिकारियों ने पल्ला झाड़ा
नगर निगम जलकल विभाग के अवर अभियंता अशोक कुमार ने गंगाजल सप्लाई से पल्ला झाड़ लिया। उनका कहना है कि प्रतिभा कंपनी के हरिप्रसाद शर्मा और जल निगम के अवर अभियंता ने जलाशय में पानी छोड़ने के लिए केवल टेस्टिंग की बात कही थी। हमने पूरा गंगाजल जलाशय में छोड़ने नहीं दिया था। उस समय तो चार बाल्टी गंगाजल निकलवाया था, जो साफ था। लेकिन बाद में जल निगम की पाइप लाइन से जमा मिट्टी और रेत भी गंगाजल के साथ जलाशय में आ गया। बुधवार को एक भी बूंद गंगाजल जलाशय में नहीं खुलने दिया।
महापौर ने लगाई फटकार
महापौर हरिकांत अहलूवालिया, पार्षद पंकज कतीरा और पूर्व पार्षद रविंद्र तेवतिया दिन निकलते ही सर्किट हाउस स्थित जलाशय पहुंच गए। उन्होंने नगर निगम, जल निगम, प्रतिभा कंपनी के अधिकारियों को मौके पर बुलवाया और जमकर फटकार लगाई। उन्होेंने निर्देश दिए कि बगैर टेस्टिंग कराए, प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि और जनता को विश्वास में लिए बगैर गंगाजल नहीं छोड़ा जाएगा। पाइप लाइन को साफ किया जाए और लगातार एक सप्ताह तक पानी की जांच की जाए। महापौर ने कहा कि गंगाजल परियोजना की जांच केंद्र सरकार से कराई जाएगी। इसकी शिकायत उप्र सरकार नगर विकास विभाग को भेजी जाएगी। इस दौरान नगर निगम के सहायक अभियंता एके सिंघल, अवर अभियंता अशोक कुमार, जल निगम सहायक अभियंता आरपी सिंह, अवर अभियंता जोगेंद्र सिंह, एसके गुप्ता, अधिशासी अभियंता रामहेत सिंह मौजूद रहे।
रिपोर्ट दर्ज कराने की चेतावनी
महापौर जब अधिकारियों को निर्देश दे रहे थे तो जल निगम के अधिशासी अभियंता रामहेत सिंह हंस रहे थे। महापौर ने अधिशासी अभियंता की हरकत पर नाराजगी जताई, साथ ही कहा कि गंदा पानी पीने से कोई बीमार हुआ तो रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी। इतना सुनते ही अधिशासी अभियंता शांत हो गए।
पाइप लाइन में जमा है मिट्टी
जल निगम की पाइप लाइन में मिट्टी जमा है। जिस प्रकार से पहले ही दिन गंगाजल में मिट्टी के अंश मिले हैं, उससे साफ जाहिर है कि पाइप लाइन के जोड़ मिलते समय सावधानी नहीं बरती गई है। पिछले एक साल से चल रही पाइप लाइन की टेस्टिंग पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। वहीं जलाशय के ओवरहेड टैंक की सफाई भी जून 2014 में की गई थी। उसमें भी गंदगी हो सकती है।
ट्रीटमेंट प्लांट पर भी उठ रही उंगली
जानकारों ने पाइप लाइन के साथ ही ट्रीटमेंट प्लांट पर भी शक जाहिर किया है। लोगों का मानना है कि कहीं भोला की झाल से सीधे तो पानी पाइप लाइन में नहीं छोड़ दिया गया है। जांच के बाद ही इस सवाल का जवाब मिल सकेगा। अभी तक अधिकारियों की लापरवाही ही सामने आई है।
जलाशय होना चाहिए साफ
सर्किट हाउस स्थित जलाशय में छोड़े गए गंगाजल की गंदगी जमा हो गई है। इसकी बानगी बुधवार को क्षेत्र में सप्लाई गिए गए पानी में भी देखने को मिली। कुछ इलाके में गंदा पानी पहुंचा। पार्षद पंकज कतीरा, पूर्व पार्षद रविंद्र तेवतिया का कहना है कि जलाशय की सफाई की जानी चाहिए। अगर सफाई नहीं होती है तो जलाशय में जमा मिट्टी पानी के साथ घरों तक पहुंचेगी।