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सेंक्चुरी के मैनेजमेंट प्लान पर काम शुरू

Sat, 05 Nov 2016 02:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरों
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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 पांच जिले और 2073 वर्ग किमी क्षेत्र में फैली हस्तिनापुर सेंक्चुरी के नए मैनेजमेंट प्लान पर काम शुरू हो गया है। एक्सपर्ट्स की कोर कमेटी ने दो दिन तक बिजनौर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, हापुड़ और बुलंदशहर जिले में सेंक्चुरी का दौरा कर वन्य जीवों और उनके हैबिटेट की जानकारी जुटा ली है। सेंक्चुरी के आसपास तेजी से हुए बदलाव और वन्य जीवों के लिए बढ़ते खतरे के बीच मैनेजमेंट प्लान जरूरी हो गया है। प्लान बनने के बाद वन विभाग का अगला कदम सेंक्चुरी में इको टूरिज्म शुरू करने का है।
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 वर्ष-1986 में हस्तिनापुर सेंक्चुरी का नोटिफिकेशन हुआ था। तभी से सेंक्चुरी क्षेत्र उपेक्षा का शिकार है। सेंक्चुरी की कई बातें ऐसी हैं, जो इसे अनोखा बनाती हैं। देश की यह सबसे बड़ी सेंक्चुरी है। बारहसिंघा संरक्षण के लिए बनी यह देश की इकलौती सेंक्चुरी है। गंगा किनारे खोला (मिट्टी के ऊंचे टीले) सिर्फ यहां पर पाए जाते हैं, जो वन्य जीवों के लिए संजीवनी हैं। सेंक्चुरी के साथ कुछ विडंबनाएं भी हैं। जैसे आज तक इसके क्षेत्र की सटीक मार्किंग नहीं हो सकी है। वाइल्ड लाइफ स्टॉफ नहीं है। वाइल्ड लाइफ का डिविजन भी नहीं हुआ। देर से ही सही, लेकिन अब वन विभाग ने नया मैनेजमेंट प्लान बनाने की शुरुआत कर दी है। इसके लिए पहले एक वर्कशॉप से हुई थी, जिसमें देश भर से वन्य जीव विशेषज्ञों को बुलाया गया था। एक कोर कमेटी बनाई गई, जिसकी मदद से मेरठ रेंज के वन संरक्षक एसके अवस्थी मैनेजमेंट प्लान तैयार कर रहे हैं।

वाइल्ड लाइफ की ली जानकारी
मुख्य वन संरक्षक मेरठ जोन मुकेश कुमार के मुताबिक, वन विभाग, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ, वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के रिटायर प्रोफेसर और अन्य एक्सपर्ट की टीम ने बृहस्पतिवार और शुक्रवार को सेंक्चुरी क्षेत्र का दौरा किया। इस दौरान जलीय और वन्य जीवों के बारे में जानकारी जुटाई। मैनेजमेंट प्लान में सेंक्चुरी में मौजूद वन्य जीव और जंगल को कैसे सुरक्षित व संरक्षित किया जाए, इसकी योजना बनेगी। इससे ग्रामीणों को भी जोड़ा जाएगा। प्लान वर्किंग में आने के बाद अगला कदम इको टूरिज्म का होगा।
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गंगा किनारे मिट्टी के टीले हैं मददगार
सेंक्चुरी क्षेत्र की एक खास बात वाइल्ड लाइफ को सपोर्ट करती है। गढ़ से लेकर मुजफ्फरनगर में पुरकाजी तक गंगा किनारा खोला बना है। खोला मिट्टी के टीले हैं, जो जलीय जीव और बारहसिंघा के लिए मुफीद ठिकाना हैं। इनसे जलाशयों में पानी का स्तर मेंटेन रहता है। गंगा किनारे यह टीले और कहीं नहीं पाए जाते। खास बात यह है कि ये टीले गंगा के सिर्फ एक किनारे पर हैं।

600 से अधिक हैं बारहसिंघा
हस्तिनापुर सेंक्चुरी क्षेत्र में हाल में रिमोट सेंसिंग से बारहसिंघा की गिनती कराई गई थी। इसमें पता चला कि सेंक्चुरी में 600 से अधिक बारहसिंघा हैं। बारहसिंघा उत्तर प्रदेश का स्टेट एनिमल है। सारस स्टेट बर्ड है। ये दोनों ही इस सेंक्चुरी में पाए जाते हैं। मुजफ्फरनगर क्षेत्र में सबसे अधिक बारहसिंघा हैं। परीक्षितगढ़ और हस्तिनापुर में भी हैं।

संरक्षण और सुरक्षा पर फोकस
सेंक्चुरी क्षेत्र में मौजूद पशु, पक्षी और जलीय समेत अन्य जीवों के संरक्षण की योजना बनेगी। हैबिटेट को कैसे सुरक्षित किया जाए, इसके लिए एक्सपर्ट्स के सुझाव शामिल करते हुए कार्ययोजना बनेगी। क्षेत्रीय लोगों को जागरूक किया जाएगा। प्लान का मकसद सेंक्चुरी में जो भी धरोहर है, उसे सुरक्षित और संरक्षित करना है। सेंक्चुरी में लोगों के दखल को भी कम करना है।
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सेंक्चुरी एक नजर में
एरिया - 2073 वर्ग किमी
जिले - मेरठ, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, हापुड़ और बुलंदशहर
लाइफ लाइन - 170 किमी गंगा नदी का किनारा
खास बात - स्टेट एनिमल बारहसिंघा और स्टेट बर्ड सारस रहते हैं
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