सूरजकुंड स्थित संप्रेक्षण गृह में बृहस्पतिवार सुबह से चल रहा बवाल आखिरकार 21 घंटे बाद शांत हो गया। देर रात तक पुलिस और अफसरों की मशक्कत के बाद छतों पर चढे़ किशोरों ने पथराव बंद किया और कमरों में लौट गए।
संप्रेक्षण गृह में दो मई को हुए बवाल में दर्ज मुकदमा वापस लेने की मांग को लेकर किशोरों ने बृहस्पतिवार सुबह सात बजे बवाल शुरू किया था, जो रात भर जारी रहा। देर रात तक किशोर छतों पर चढ़कर पुलिस पर पथराव करते रहे।
एडीएम सिटी एसके दुबे, एसपी सिटी ओमप्रकाश, सिटी मजिस्ट्रेट केशव कुमार, एसीएम ज्योति राय, एसओ नौचंदी किशोरों को शांत करने की कोशिशों में जुटे रहे। किशोरों का कहना था कि दो मई को हुई घटना में मुकदमा दर्ज होने से उन्हें अपने पुराने केस में जमानत मिलने में दिक्कत होगी। अफसरों ने कहा कि बार-बार बवाल करोगे, तो कोई तुम्हारी नहीं सुनेगा। पहले अपना आचरण सुधारो और बवाल बंद करो।
इस नसीहत के बाद तड़के करीब चार बजे किशोर शांत हुए। सुबह मेडिकल में भर्ती संप्रेक्षण गृह अधीक्षक मिथलेश सिंह छुट्टी मिलने पर संप्रेक्षण गृह पहुंच गए। अधीक्षक ने बताया कि उन्होंने अफसरों के निर्देश पर नौचंदी पुलिस को तहरीर दी है। एसपी सिटी का कहना था कि रिपोर्ट दर्ज की जाएगी।
‘मैं तो भर्ती था सर, कैसे दूं तहरीर’
इस बवाल में एक अधिकारी ने मिथलेश कुमार से तहरीर देने को कहा, तो उन्होंने कह दिया कि वह तो घटना वाले दिन मेडिकल में भर्ती थे। ऐसे में कैसे तहरीर दे दें। लेकिन अफसर ने साफ कह दिया कि अधीक्षक आप हैं, तो तहरीर भी आप ही देंगे।
इसके बाद अधीक्षक को तहरीर देनी पड़ी। अधीक्षक ने बताया कि बुधवार को इस केस की रिमांड पेशी के दौरान किशोरों ने धमकी भरे लहजे में उनसे कुछ बातें कही थीं। चर्चा रही कि अधीक्षक बवाल को भांप गए थे। इसीलिए जाकर मेडिकल में भर्ती हो गए। अधीक्षक को यह भी डर था कि यदि तहरीर दी, तो किशोरों का गुस्सा उन पर और ज्यादा भड़क सकता है।