वायरल, डेंगू और चिकनगुनिया को लेकर लोगों में दहशत का माहौल है। हल्का सा बुखार होते ही लोग अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। वहीं चिकित्सकों का कहना है कि डेंगू या चिकनुनिया जानलेवा नहीं है, बशर्ते मरीज को सही समय पर सही इलाज मिले।
मरीज की हालत ज्यादा बिगड़ने के वे ही मामले सामने आ रहे हैं, जिन्होंने शुरुआत में ही सही इलाज नहीं लिया। मेडिकल साइंस में वायरल को लेकर जितने भी शोध हुए हैं, उसमें से अधिकांश के अंदर डेंगू व चिकनगुनिया को जानलेवा नहीं माना गया है। डेंगू के मरीज को खून की जांच के बाद ही इलाज देने की जरूरत होती है। डेंगू की शुरुआती स्टेज में पैरासिटामोल लेकर उससे बचा जा सकता है। अगर शरीर में कही पर इंफेक्शन दिखाई देता है तो फिर हल्की एंटीबायोटिक दवाएं भी दी जाती है। साथ ही शरीर में पानी की कमी न होने दें। क्योंकि शरीर में पानी की कमी होने पर उल्टी से लेकर फेफड़ों में इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है।
डेंगू और चिकनगुनिया भी एक वायरल
मेडिकल कॉलेज की सीनियर फिजीशियन डॉ. योगिता सिंह का कहना है कि डेंगू और चिकनगुनिया भी एक वायरल है। अगर समय पर इलाज मिले तो यह जानलेवा नहीं है। जब तक मरीज के पूरे शरीर पर चखते ना पड़ जाये, या फिर बेहद ज्यादा उल्टी ना हो रही हो तब तक घबराने ने कोई जरूरत नहीं है। डेंगू और चिकनगुनिया के मरीज को समय पर इलाज मिले तो पांच से सात दिन में स्वस्थ हो जाता है। अधिकांश केस ऐसे सामने आ रहे हैं जो वायरल होने पर पहले खुद से दवा लेते रहे और बाद में किसी झोलाछाप चिकित्सक से वो भी बिना जांच कराए। ऐसे में मरीज की सेहत बिगड़ती चली जाती है। क्योंकि डेंगू व चिकनगुनिया के मरीज को तब तक एंटीबायोटिक नहीं दी जाती, जब तक इंफेक्शन के लक्षण दिखाई न दें।
वायरल में ये करें
डॉ. योगिता सिंह का कहना है कि वायरल के लक्षण दिखाई देने पर सिर्फ पैरासिटामोल लें। किसी तरह कीएंटीबायोटिक दवा का सेवन ना करें। अगर बुखार एक दिन से ज्यादा रहता है तो फिर चिकित्सा की सलाह से जांच कराकर ही इलाज लें। तरल पदार्थों के ज्यादा सेवन के साथ ही भरपूर आराम करें।
डेंगू और चिकनगुनिया के केस तेजी से बढे़
डेंगू और चिकनगुनिया के मरीजों की संख्या में अब तेजी से इजाफा हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार जिले में डेंगू के केस बढ़कर 33 हो गए हैं। वहीं चिकनगुनिया के मरीजों की संख्या 66 तक पहुंच गई है।
वहीं केस सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग के माथे पर पसीना आ रहा है। विभाग को संबंधित मरीजों के घरों पर टीमों को भेजकर फॉगिंग करने से लेकर कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कराना पड़ रहा है। उधर, शहर के बाकी जगहों पर फॉगिंग कराने का जिम्मा भी स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम के पास है। ऐसे में तय किया गया है कि नगर निगम की टीम स्वास्थ्य विभाग से इनपुट लेकर ही काम करेगी। यानी जिस क्षेत्र में ज्यादा लोग बीमार हैं उन्हें प्राथमिकता दी जा रही है।
सीएमओ डॉ. शरद त्यागी ने बताया है कि देहात क्षेत्र में 28 कैंप आयोजित किए गए हैं, जिसमें 3489 लोगों को देखा गया, इनमें से 867 मरीज बुखार से पीड़ित थे। इस दौरान 490 लोगों के ब्लड सैंपल लिए गए हैं। वहीं शहरी क्षेत्र में 12 कैंप आयोजित किए गए हैं जिनमें 1641 लोग पहुंचे। इसमें से 425 मरीज बुखार से पीड़ित आए हैं। 372 मरीजों के ब्लड सैंपल लिए गए।
दवा होनी चाहिए उपलब्ध
सीएमओ डॉ. शरद त्यागी ने कहा कि चिकित्सा कैंप के दौरान टीम के पास जरूरी दवाएं होनी चाहिए। अगर किसी स्वास्थ्य केंद्र पर दवाओं की कमी है तो वो सीएमओ कार्यालय स्थित औषधि भंडार से ले ले। स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारियों को निर्देश दिया गया है कि वो दवाओं की उपलब्धता को नियमित तौर पर देखते रहें ताकि पहले से सारी दवा उपलब्ध रहें।