मेरठ। शास्त्रीनगर स्थित राजवंश भवन में ब्रह्मलीन जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी दिव्यानंद तीर्थ महाराज की सातवीं पुण्यतिथि के अवसर पर दिव्य मानस प्रवचन का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा अगर मनुष्य को शुद्ध अत: करण से शुद्धता चाहिए तो कथा पूर्ण निष्ठा, ध्यान मग्न होकर रहना चाहिए। रामचरित मानस के श्रवण मात्र से मनुष्य का उद्धार संभव है।
जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ महाराज ने कहा कि श्रद्धा के बिना धर्म कार्य संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के बिना किसी वस्तु का ज्ञान अधूरा रहता है। उसी प्रकार जीवन में गुरु के बिना ज्ञान अधूरा है। पुस्तक में ज्ञान तो होता है।ले किन उस ज्ञान का सही बोध केवल गुरु ही कराते हैं। गुरु के मार्गदर्शन के बिना ज्ञान कभी कभी व्यक्ति और समाज दोनों के लिए घातक भी हो सकता है।
महाराज ने कहा कि जीवन की आंतरिक प्रवृत्तियों को शुद्ध करने के लिए गुरु और इष्ट का आश्रय आवश्यक है। गुरु के बिना न ज्ञान संभव है और न ही मोक्ष की प्राप्ति संभव है। उन्होंने रामचरितमानस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसका श्रवण और पाठन मनुष्य को विवेक प्रदान करता है तथा सांसारिक बंधनों से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः रामायण पाठ से हुई। पंडित पंकज शास्त्री ने पूजन संपन्न कराया। प्रवक्ता आलोक सिसोदिया ने बताया कि 31 मार्च को कथा का आयोजन दोपहर 3 बजे से किया जाएगा। रामचरितमानस पूजन एवं व्यास पीठ पूजन ज्ञानेंद्र अग्रवाल ने सपत्नीक तथा शांतिस्वरूप गुप्ता ने किया। मुख्य अतिथि कपिल देव अग्रवाल ने भी व्यासपीठ का पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। सेवा समिति के अध्यक्ष डॉ. अतुल गर्ग ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।
मुख्य संयोजक मनोज गर्ग ने कार्यक्रम का संचालन किया। इस अवसर पर मनोज सेन, अमित गर्ग, आलोक सिसोदिया, विपिन रस्तोगी, नरेंद्र राष्ट्रवादी, हरीश वशिष्ठ, अमित गुप्ता, आलोक सिसोदिया, कृष्ण गोपाल, राकेश कुमार गोयल, संजय गोयल, पार्षद शांता पुंडीर एवं संजीव पुंडीर सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।