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वायुसेना स्टेशन पर दी गई शहीद को सलामी, एक साल पहले भी गोली खाई थी जयद्रथ ने

Sat, 22 Jul 2017 08:52 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, सहारनपुर, शशांक मिश्र
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शहीद के शव को ले जाते सेना के जवान - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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कश्मीर में शहीद हुए सैनिक के पार्थिव शरीर को पूरे सम्मान के साथ वायुसेना स्टेशन में सलामी दी गयी। इस मौके पर वायुसेना के जवानों ने मातमी धुन बजाई तथा वायुसेना स्टेशन के कमांडर, डीएम, एसएसपी ने शहीद सैनिक को पुष्प चक्र अर्पित कर वीरता को नमन किया। शनिवार को शाम 6 बजकर 20 मिनट पर कश्मीर से वायुसेना के विशेष विमान से शहीद सैनिक जयद्रथ सिंह का पार्थिव शरीर वायुसेना की हवाई पट्टी पर पहुंचा। जहां विमान से उतारने के बाद शव को हवाई पट्टी पर ही एक विशेष स्थान पर रखा गया। पहले से मौजूद स्टेशन कमांडर, जिलाधिकारी, एसएसपी, सीओ, एसडीएम, एसओ सरसावा तथा अन्य अधिकारियों ने शहीद सैनिक को नमन किया। शहीद सैनिक की अंतिम विदाई में वायुसैनिकों ने मातमी धुन बजायी जिसके बीच अधिकारियों ने शहीद को पुष्प चक्र अर्पित किया। इसके बाद पूरे सम्मान के साथ शहीद के पार्थिव शरीर को विशेष वाहन में रखकर रुड़की के लिये रवाना किया गया। जैसे शहीद सैनिक का पार्थिव शरीर वायुसेना स्टेशन के मुख्य द्वार से बाहर निकलकर सड़क पर आया लोगों ने सलामी दी। रुड़की से रविवार को सुबह पार्थिव शरीर भगवानपुर भेजा जाएगा।
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अपनी यूनिट का जांबाज सिपाही था जयद्रथ 

शहीद के घर पहुंचे डीएम - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
जयद्रथ की शहादत और वीरता पर न सिर्फ परिवार और गांव को, बल्कि पूरी यूनिट को को नाज है। अपनी यूनिट का जांबाज सिपाही था जयद्रथ। साथ रहे भाई सहदेव के अनुसार दुश्मनों के ललकारने पर उन पर मौत बनकर टूट पड़ता था। पिछले साल भी उसने गोली खाई थी। धोखे से गोली न मारी होती तो जयद्रथ दुश्मनों पर इस बार भी भारी पड़ता। शहीद जयद्रथ की यूनिट में उसके साथ रहे भाई सहदेव ने बताया कि जयद्रथ अपनी यूनिट का बहादुर और जांबाज सिपाही था। दुश्मनों के नाम से उसका खून खौल उठता था। पिछले साल भी हमला हुआ था, जिसमें वह बहादुरी से लड़ा था। उसकी उंगली में गोली लगी थी और पैरों में कई छर्रे लगे थे। लेकिन जयद्रथ उस समय भी बिल्कुल भी विचलित नहीं हुआ था और दुश्मनों के दांत खट्टे कर दिए थे। इस बार भी पाकिस्तान की ओर से धोखे से गोलीबारी न की होती या जरा सा भी पता चल जाता तो उसका भाई आज न सिर्फ जीवित होता, बल्कि दुश्मनों को सबक सिखा देता। उसे ही नहीं पूरी यूनिट को उसकी वीरता पर नाज रहा है। 

अपने भाई से न मिल पाने का रहेगा जिंदगी भर मलाल

शहीद के भाई से बात करते डीएम - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
सहदेव को अपने भाई शहीद हुए जयद्रथ से न मिल पाने का जिंदगी भर मलाल रहेगा। सहदेव ने बताया कि वह यूनिट में लगातार दो साल तक उसके साथ एक कमरे में रहा था। उसके बाद जयद्रथ तो यूनिट में रहा और वह आरआर में चला गया। काफी महीनों से मुलाकात नहीं हुई थी। जयद्रथ 20 दिन की छुट्टी लेकर गांव आया तो उसने भी छुट्टी की अर्जी दे दी थी। उसने सोचा कि काफी दिन बाद दोनों भाई गांव में मिल लेंगे। लेकिन उसकी छुट्टी देर से मंजूर हुई। 16 जुलाई को जयद्रथ अपनी छुट्टी पूरी कर ड्यूटी ज्वाइन करने के लिए चला गया, जबकि 16 जुलाई को ही वह एक माह की छुट्टी पर गांव में पहुंचा। कुछ ही घंटे पहले जयद्रथ निकल गया। वह उससे मिल नहीं पाया, यह पता नहीं था कि अब कभी नहीं मिल पाएगा। 
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1400 की आबादी वाले गांव में 70 सेना में

विलाप करती शहीद की पत्नी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
जिले की धरती वैसे तो कई मायनों में ऐतिहासिक है, लेकिन अगर शौर्य और वीरता की बात करें तो यहां के सपूतों ने हमेशा से ही सिर ऊंचा किया है। चाहे जंगे आजादी हो, भारत-पाक युद्ध या कारगिल की लड़ाई, सहारनपुर के वीर सीमा पर दुश्मनों के दांत के खट्टे करते रहे हैं। शहीद जयद्रथ की शहादत के बाद भी बड़गांव कस्बे के लोग अब अपने लाड़लों को सीमा पर भेजने को तैयार हैं। उनका कहना है कि अगर पाक से आर-पार की जंग हो तो वे अपने बेटों को सीमा पर भेजने से पीछे नहीं हटेंगे।
देश की सुरक्षा में तैनात शहीद जयद्रथ की शहादत ने हर किसी के आंखों को नम कर दिया है। मगर, वीरों के शौर्य से सहारनपुर का सीना भी गर्व से चौड़ा हो जाता है। कारगिल युद्ध में गंगोह के जेहरा गांव के राजेश बैरागी, बड़गांव के दल्हेड़ी निवासी अरविंद कुमार और कुपवाड़ा में वर्ष 2003 में हवलदार वेदप्रकाश सिंह की शहादत ने सहारनपुर को गौरवान्वित किया था। इसके अलावा सरसावा एयरबेस का हेलीकाप्टर यूनिट सीमा पर जवानों को हथियार और रसद आपूूर्ति के दौरान दुश्मनों के निशाने पर आ गया था। उसमें चार जवान शहीद हो गए थे। जयद्रथ की शहादत ने एक बार फिर उन शहीदों की याद ताजा करा दी। उधर, भगवानपुर के ग्रामीणों ने अपने और भी बेटों को मातृभूमि की रक्षा के लिये सीमा पर भेजने को तैयार हैं। लेकिन केन्द्र सरकार के नरम रवैये के चलते ग्रामीणों में भारी रोष बना है। ग्रामीणों ने अब और शहादत रोकने के लिये सर्जिकल स्ट्राइक नहीं, बल्कि पाक से आरपार की जंग की सरकार से मांग की हैं। मात्र चौदह सौ की आबादी वाले गांव भगवानपुर के करीब सत्तर युवक देश की सुरक्षा में तैनात हैं। यहां के कई ग्रामीणों ने अपने अकेले अकेले बेटे भी सेना में भेज रखा है। यहां के निवासी सैनिक अनिल, धर्मसिंह, सोनू व मोनू, सुधीर, जयकरण, अंकुर व संजय के परिजनों ने जयद्रथ की इस शहादत पर गहरी नाराजगी भी जताई है।

सहारनपुर से रुड़की रवाना हुआ शहीद का शव
शहीद जयद्रथ का पार्थिव शरीर सेना के विशेष विमान से सरसावा एयरफोर्स स्टेशन पर लाया गया। यहां से कड़ी सुरक्षा में उसे रुड़की ले जाया गया। अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि रुड़की से रविवार सुबह पूरे सैन्य सम्मान से शहीद का शव उनके गांव भगवानपुर ले जाया जाएगा। यहां राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।
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