इसी पेड़ पर लटकाकर दी जाती थी फांसी
- फोटो : अमर उजाला
स्वतंत्रता संग्राम की गवाह सहारनपुर की धरती भी रही है। यहां भी क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों के खिलाफ बिगुल बजाया था। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान 1930 में मोहल्ला चौक फरोशान से क्रांतिकारियों की बम फैक्टरी पकड़ी गई थी, जिसमें शहीद-ए-आजम सरदार भगत सिंह के साथी डॉ. गया प्रसाद, शिव वर्मा और जयदेव कपूर को अंग्रेजी हुकूमत ने गिरफ्तार किया था।
स्वतंत्रता संग्राम के दौरान शहर के मोहल्ला चौक फरोशान में दो मंजिला मकान में क्रांतिकारियों की बम फैक्ट्ररी चल रही थी, जिसमें नीचे के हिस्से में दवाखाना चलता था और ऊपर बम बनाए जाते थे। स्वतंत्रता आंदोलन में सहारनपुर की पत्रकारिता का योगदान विषय पर शोध कर चुके डॉक्टर विरेंद्र आजम बताते हैं कि अंग्रेजी हुकूमत ने बम बनाने की फैक्टरी पकड़ी थी। बमों के माध्यम से आजादी के मतवालों का मकसद किसी को जनहानि पहुंचना नहीं था। वह धमाके कर अंग्रेजी हुकूमत को देश छोड़ने की चेतावनी देते थे।
इसके साथ ही भारतीयों को आजादी की लड़ाई योगदान करने के लिए प्रेरित करते थे। 1930 में क्रांतिकारी डॉक्टर गया प्रसाद और शिव वर्मा बम फैक्टरी में मौजूद थे, तब पुलिस ने छापा मारकर बम फैक्ट्ररी को पकड़ा था और उनको गिरफ्तार किया था। पुलिस ने तब बम फैक्ट्ररी में कैंप कर लिया और अगले दिन जब रात के समय जयदेव कपूर वहां पहुंचे तो उन्हें भी पकड़ लिया गया था। यह तीनों क्रांतिकारी शहीद-ए-आजम भगत सिंह के साथी थे। इसके बाद इनके चौथे साथी ठाकुर मुकुंद सिंह को भी गिरफ्तार किया था। सहारनपुर से पूरे देश में बम बनाकर भेजे जाते थे। क्रांतिकारी इन बमों के माध्यम से अलग-अलग जगहों पर धमाके कर अंग्रेजों को देश छोड़ने की चेतावनी देते थे।
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