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सहारनपुर : आक्सीजन आपूर्ति में लापरवाही बरतने की शिकायत पर मेडिकल काॅलेज के प्रिसिपल दिनेश सिंह मर्तोलिया सस्पेंड

Mon, 26 Apr 2021 11:26 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

 -खराब थे 40 सिलिंडर, प्राचार्य ने नहीं कराए ठीक 
- आक्सीजन सिलिंडरों के नोजल खराब होने से नहीं हो रहा था उपयोग 
- आक्सीजन प्रभारी और आपूर्तिकर्ता फर्म के कहने पर भी नहीं जागे प्रचार्य
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oxygen cylinder - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के सहारनपुर मेडिकल में आक्सीजन आपूर्ति में लापरवाही बरतने की शिकायत के बाद मेडिकल कालेज के प्रिंसिपल डाक्टर दिनेश सिंह मर्तोलिया सस्पेंड कर दिया गया। शेखुल हिंद मौलाना महमूद हसन राजकीय मेडिकल कॉलेज में 300 ऑक्सीजन सिलिंडर की उपलब्धता है, लेकिन उनमें से 40 सिलिंडरों के नोजल कई माह से खराब थे।

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इसी वजह से इन सिलिंडरों का उपयोग नहीं हो पा रहा था, जबकि कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़ने पर सिलिंडरों की आवश्यकता बढ़ती जा रही थी। बावजूद इसके प्राचार्य डॉ. दिनेश सिंह मार्तोलिया कई महीने से खराब ऑक्सीजन सिलिंडरों को ठीक नहीं करा रहे थे, जबकि ऑक्सीजन प्रभारी और गैस आपूर्ति करने वाली फर्म की तरफ से भी प्रार्चा को बताया गया था। 

जिलाधिकारी अखिलेश सिंह द्वारा की गई समीक्षा में यह सब बातें उजागर हुई हैं। जिलाधिकारी ने पूर्व में भी समीक्षा कर व्यवस्था में सुधार की हिदायत दी थी, लेकिन प्राचार्य के स्तर पर उसमें लगातार हीलाहवाली बरती गई। 

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प्राचार्य को पिछले 10 दिनों से लगातार आक्सीजन आपूर्ति की व्यवस्था का अनुश्रवण करने के लिए कहा गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। समीक्षा में यह भी पता चला कि 300 में से 40 आक्सीजन सिलिंडरों के नोजल खराब थे।

आक्सीजन प्रभारी डॉ. नवाब सिंह ने भी प्राचार्य को इस बारे में बताया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की। ऑक्सीजन आपूर्तिकर्ता फर्म मेसर्स अग्रवाल मेरठ ने भी कहा कि कई माह से 40 सिलिंडरों में मामूली खामी को दूर कराने के लिए प्राचार्य से अनुरोध किया मगर कोई कार्रवाई नहीं की। 

आरटीपीसीआर जांच कराने में भी बरती शिथिलता 
यह भी पता चला कि 5000 आरटीपीसीआर टेस्ट की रिपोर्ट मेडिकल कालेज की लैब में प्रतीक्षित है। समीक्षा में पता चला कि लैब द्वारा जिन कन्ज्यूमेबल्स का इनडेंट प्राचार्य को दिया जाता था, उन पर तेजी से कार्रवाई नहीं होती थी। इसके अलावा मेडिकल कालेज के विभिन्न विभागों एवं प्राचार्य के मध्य समन्वय की कमी रही। 

रात में फोन कर लेते थे स्विच ऑफ 
समीक्षा में यह भी बात सामने आई कि रात में इमरजेंसी की स्थिति में प्राचार्य को कॉल करने पर उनका फोन स्विच आफ रहता है। इस संबंध में कई बार प्राचार्य को कार्यप्रणाली सुधारने के लिए कहा गया, लेकिन गंभीरता नहीं बरती।
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