कच्ची शराब बनाने के हैं कई तरीके
जानकारों की मानें, तो गांवों में कच्ची शराब कई प्रकार से बनाई जाती है। इनमें एक तरीका पुराने गुड़ और फलों को सड़ाकर उससे शराब तोड़ते (आसवानी) हैं। उससे तैयार होने वाले लहन को गर्म करके शराब बनाई जाती है। इसके अलावा एथेनॉल की 200 मिलीलीटर मात्रा से करीब 20 बोतल तक बना लेते हैं, जबकि एक और खतरनाक तरीके ऑक्सीटोसिन जैसे इंजेक्शन के इस्तेमाल शराब बनाने का भी बताया जा रहा है।
ठेकों पर मिलने वाली शराब में एल्कोहल की मात्रा
डिस्टिलरी से बनने के बाद ठेकों तक पहुंचने वाली शराब में एल्कोहल की मात्रा का निर्धारण होता है। एल्कोहल की कितनी मात्रा है, उसका उल्लेख भी बोतल, अध्धे और पव्वे पर होता है। निर्धारण के मुताबिक बीयर में 8 प्रतिशत, रम में 42.8 प्रतिशत और व्हिस्की में भी एल्कोहल की 42.8 प्रतिशत मात्रा होती है। वहीं, देशी शराब में तीन प्रकार से एल्कोहल की मात्रा होती है, जो उसके दाम को भी निर्धारित करती है। 25 डिग्री वाली देशी शराब का पव्वा (200मिली) 45 रुपये, 36 डिग्री वाला 65 रुपये और 42 डिग्री वाला पव्वा 75 रुपये में बेचा जाता है।
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