उधर, मोहल्ला गुज्जरवाड़ा में आयोजित हुई जमीयत उलमा-ए-हिंद की स्थानीय यूनिट की बैठक में उपाध्यक्ष चौधरी सादिक ने कहा कि मौलाना मदनी ने जिस जिम्मेदारी के साथ कौम और मिल्लत की सेवा कर रहे हैं वो अपने आपमें मिसाल है और उनसे पूरी कौम को फायदा पहुंच रहा है। अगर मौलाना मदनी जमीयत उलमा-ए-हिंद के महसचिव पद से त्यागपत्र देते हैं तो यह जमीयत और मिल्लत के लिए बड़े नुकसान का सबब बनेगा। चौधरी सादिक ने कहा कि जमीयत अध्यक्ष कारी उस्मान मंसूरपुरी किसी भी कीमत पर मदनी का इस्तीफा स्वीकार न करें। अध्यक्षता हाजी मुनशाद व संचालन सादिक सिद्दीकी ने किया। इस मौके पर कारी जुबैर, महमूद, मो. सरवर, सागर, मुकीम, जबरुद्दीन, मान्ना चौधरी आदि मौजूद रहे।
मदनी को दारुल उलूम की मजलिस-ए-शूरा का सदस्य बनाए जाने की चर्चा
मौलाना महमूद मदनी ने महासचिव पद से इस्तीफा क्या दिया कि तरह तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। गुरुवार को मौलाना मदनी के दारुल उलूम की मजलिस-ए-शूरा के सदस्य बनाए जाने की चर्चा शुरू हो गई। इतना ही नहीं अफवाहों में कारी मोहम्मद उस्मान मंसूरपुरी को दारुल उलूम का मोहतमिम तक बनाया जा रहा है।
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